अनुवाद

  • धन्यवाद सखि..क्षमा कीजियेगा कुछ दिनों से आपकी प्रतिक्रियाओं का जवाब नहीं दे पाई 🙏🙂

  • जब कभी भी टूटे ये तंद्रा तुम्हारी,
    जब लगे कि हैं तुम्हारे हाथ खाली!

    जब न सूझे ज़िन्दगी में राह तुमको,
    जब लगे कि छलते आये हो स्वयं को!

    जब भरोसा उठने लगे संसार से ,
    जब मिलें दुत्कार हर एक द्वार […]

  • दर्द बनके आँखो के किनारों से बहती है!
    बनकर दुआ के फूल होंठो से झरती है!!

    देती है तू सुकून मुझे माँ के आँचल सा!
    बनके क़भी फुहार सी दिल पे बरसती है!!

    खुशियाँ ज़ाहिर करने के तरीक़े हज़ार है!
    मेरे दर्द की गहराई […]

    • “होगी ग़ुलाम दुनिया ये पराई ज़बान की !
      मेरी मातृभाषा तू मेरे दिल में धड़कती है!!”
      _____मातृभाषा के बारे मे बहुत ही उत्कृष्ट रचना है सखी👌👌

    • देती है तू सुकून मुझे माँ के आँचल सा!
      बनके क़भी फुहार सी दिल पे बरसती है!!
      —— वाह, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। यह कविता कवि की उच्चस्तरीय क्षमता को परिलक्षित कर रही है। कविता में एक एक विरल काव्य बोध है। अदभुत लय है और अनुपम भाव है।

    • सुंदर

    • जाऊँ कहीं भी मैं इस दुनिया जहान में!
      बन कर मेरी परछाईं मेरे साथ चलती हैं!!
      बहुत खूब

  • अत्यंत हृदयस्पर्शी रचना सखि

  • जब भी मन घिर जाता है अपने
    अंतर्द्वंदों की दीवारों से,
    जब मस्तिष्क के आकाश में छा
    जाते हैं बादल अवसादों के…!!
    तब
    छांट कर संशय के अँधियारों को,
    ये जीवन को नई भोर देती हैं,

    ‘किताबें’…..मन के बन्द झ […]

    • किताबें’…..मन के बन्द झरोखें
      खोल देती हैं..!!
      _____बिल्कुल सत्य कथन,बहुत सुन्दर रचना है सखी,📙🌹

    • सत्य कथन ,,,सुन्दर रचना

    • अतिसुंदर भाव

    • छांट कर संशय के अँधियारों को,
      ये जीवन को नई भोर देती हैं,

      ‘किताबें’…..मन के बन्द झरोखें
      खोल देती हैं..!!
      —- वाह क्या बात है, बेहतरीन पंक्तियां, बेहतरीन भाव।

  • एक महान विज्ञानी का कथन है…
    ‘हर क्रिया की बराबर किंतु विपरीत
    प्रतिक्रिया होती है’..!!
    प्रेम करने वाले इस तथ्य के जीवंत
    उदाहरण हैं….
    समाज ने जितनी तत्परता से रचे हैं
    प्रेमियों को एक दूजे से दूर […]

    • वाह अनु जी बहुत ख़ूब, ,
      “वास्तव में विज्ञान के समस्त सिद्धांतों
      की व्याख्या हेतु प्रेम सर्वोत्तम
      माध्यम है…!!”
      _____हा हा शायद आप ठीक ही कह रही हैं। जबरदस्त अवलोकन है आपका,कुछ देखा ही होगा। उत्तम लेखन

    • बहुत खूब

  • बहुत उम्दा लेखन…भारत के वीर जवानों और उनके परिवारजनों को नमन

  • याद है हमको प्रेम दिवस ऐसा भी एक आया था!
    थी रक्तरंजित वसुंधरा, और आकाश थरथराया था!!

    एक कायर आतंकी ने घोंपा था सीने पर खंजर!
    ख़ून बहा कर वीरों का, बदला था वादी का मंजर!!

    चालीस जवानों का काफ़िला ची […]

  • बहुत बहुत शुक्रिया सखि

  • वो भटकता रहा लफ़्ज़ दर लफ़्ज़
    गढ़ने को परिभाषायें प्रेम की,
    रिश्तों की, विश्वास की…!!

    और
    मैंने अंकित कर दिया हर एहसास
    उसके दिल में सिर्फ चूम के
    उसके माथे को…!!

    ‘दरअसल चुम्बन, आलिंगन […]

    • बहुत सुंदर पंक्तियां अनु जी, शायद इसे ही स्पर्श थेरेपी( स्पर्श चिकित्सा) कहते हैं,जो हमे प्रकृति प्रदत्त है।इसमें वात्सल्य भी शामिल है और प्रेम भी। बहुत खूब लाजवाब अभिव्यक्ति

    • बहुत बहुत शुक्रिया सखि

    • बहुत

    • खूबसूरत रचना,,,बहुत खूब

  • धन्यवाद सखि ❤️🌺

  • सांसारिक कुचक्रों में उलझ कर
    अपनी मौलिकता से समझौता
    करते मानव सुनो..!!
    अपने भीतर हमेशा बचा कर रखना
    इतना सा प्रेम…!!
    कि
    जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा
    आलिंगन करे तो उस प्रेम की
    ऊष्मा से पिघलकर आँसू […]

    • Jay ram jee ki

    • जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा
      आलिंगन करे तो उस प्रेम की
      ऊष्मा से पिघलकर आँसू बन
      बह उठे उसके मन में जमी
      पीड़ाओं की बर्फ…!!
      ___________पीड़ा का कितना सटीक चित्रण किया है कवि अनु जी ने अपनी रचना में, बिल्कुल अनु जी इतना प्रेम तो होना ही चाहिए,
      बहुत सुंदर भवाभिव्यक्ति,बहुत सुंदर शिल्प और कथ्य

    • धन्यवाद सखि ❤️🌺

    • पीड़ा की बर्फ बहुत सुन्दर

    • अतिसुंदर भाव

  • प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद सखि 🌺🙏

  • यदि बाँधने जा रहे हो किसी को
    वचनों की डोर से, तो इतना
    स्मरण रखना

    कहीं झोंक न दे वचन तुम्हारा
    उसे उम्र भर की अनन्त
    प्रतीक्षा में…

    क्योकि,
    प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म कर
    देती है स्वप्नों और […]

    • प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म कर
      देती है स्वप्नों और उम्मीदों के
      साथ-साथ मनुष्य की
      आत्मा को भी…!!
      _________ बहुत सुंदर और उच्च स्तरीय विचार प्रस्तुत किए हैं अनु जी आपने अपनी रचना में,बहुत ही गहरा सत्य छिपा है। रचना हृदय को छू गई , लाजवाब अभिव्यक्ति

    • प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद सखि 🌺🙏

    • बहुत खूब कहां बिछारने का कारण हमसब के कटु वचन ही है

    • बहुत खूब

    • Jay ram jee ki

  • धन्यवाद सर 🙏

  • निकाल कर फेंक दिया है मैने
    अपने भीतर से
    हर अनुराग, हर संताप…
    अब न ही कोई अपेक्षा है बाक़ी
    औऱ न ही कोई पश्चाताप..!!

    मैं मुक्त कर चुकी हूँ स्वप्न पखेरुओं
    को आँखो की कैद से…
    वो उड़ चुके हैं अपने साथ […]

  • प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद

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