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Brijmohan Swami

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Brijmohan Swami

@Brijmohan Swami • Joined Jul 2017 • Active 9 years ago

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by Brijmohan Swami

हैरानी सारी हमें ही होनी थी – बृजमोहन स्वामी की घातक कविता।

July 11, 2017 in Other

हैरानी कुछ यूँ हुई
कि उन्होंने हमें सर खुजाने का
वक़्त भी नही दिया,
जबकि वक़्त उनकी मुट्ठियों में भी नही देखा गया,
लब पर जलती हुई
सारी बात हमने फूँक दी
सिवाय इस सिद्धांत के
कि हमने सपनों की तरह
आदमी देखे,
जबकि ‘सपने’ किसी गर्भाशय में पल रहे होते तो
सारे अल्ट्रासाउंड
घड़ियों की तरह बिकते
और हम वक़्त देखने के लिए सर फोड़ते,
मेहँदी की तरह लांछन लगाते,
सिगरेटों की तरह घर फूंकते,
कुत्तों की तरह बच्चे पालते,
रक्तदान की तरह सुझाव देते,
एक हाथ से ताली बजाते,
औरतें चूड़ियों में छुपाती ‘सुहाग’
आदमी बटुओं में ‘सुहागरात’ छुपाते
और भाट पूरी रात गाते विरुदावलियाँ

सच बताऊँ तो हुआ यूँ था कि
जब हमने आज़ादी के लिए आवाज़ उठाई
तो हमारी अंगुलियां बर्फ की तरह जमी हुई मिली, हमारे गलों में
और हमने तकलीफों को
मुद्दों की तरह उठाया
जबकि ‘रोना’ कॉलेजों के शौचालयों में ही घुटाकर मरा
बाहर हमारे बनाये पोस्टर दम तोड़ते गए।

हमने हयात फूंकने की ज़हमत उठाई
और हड्डियों के बुरादे को
रोटियों में मिलाकर खाया
ताकि एक पीढ़ी बचा सकें।

प्यार के दरवाज़े हमारे लिए सिर्फ
स्कूलों की उबासियों में टिफिन की तरह ही खुलते थे
और चीन के साथ लड़ाई की
खबरों के साथ हमने नींद के केप्सूल खाये,
जबकि बीच रात पालने में खेलते
हमारे छोटे बहन-भाइयो का बदन
दैनिक जागरण और भास्कर नामक अखबारों से पोंछा जाता रहा
उनमे इसी दुनियां के लोगों के मौत की खबरे थी
हमने बिस्तरों की चादरें खींच कर
अपने बदन और चेहरे को ढक लिया था
समझदार प्रेमिकाओं की तरह।

अपनी महानता के नियमों में
मुहल्लेदारी से रिश्तेदारी तक
सान्त्वना देने के बहाने
हमने धरती रोककर
उनका मांस सहलाया,
पावरोटी सी फूली बाजुएँ लिए फिरे,
‘गूँगी चीखों’ को जन्म दिया गया,
आपत्तिजनक टिप्पणियाँ
कागजों में ही सोई रही।

संयोग से
आदमी ही हथियार बनाया गया
नौकरी सिर्फ विज्ञापनों में रही,
क्रन्तिकारी तस्वीरों में चले गए,
अंगूरों पर मौत लिखी गई,
टीवी, रेडियो और मोबाइलों पर जिंदगी

अब जाकर नशा टूटा
आज़ादी का असली मतलब देखा
हमने उन्ही रास्तों में पिरोये दस्तखत
उन्हीं सपनों को जिया
जो हमारे सर काटना चाहते थे
जबकि रेलगाड़ियों के आगे कटकर मरना सस्ता था।

सबकुछ छीनने के बाद भी
उन्हीं सांसों में सहारा लिया गया
जो सिर्फ ‘सांसें’ थी
और गुनाह सिर्फ इतना था
की हमने
घटनाओं का विरोध करना अपने बच्चों को सौंपा !!

बेज़ुबां दास्ताँ ये…
कितने दर्द छुपाएगी?

© copyright Brijmohan Swami
poem by brijmohan swami,  बृजमोहन स्वामी की हिंदी कविता

Tags: Hindi Poems for Children, कविताएँ हिन्दी, छोटी कविता हिंदी में, छोटी सी कविता, बच्चों का कविता, बच्चों की कविता, बच्चों की कवितायें, बच्चों के लिए हिन्दी कविता, बाल कविता संग्रह, बाल कविताएँ, बाल दिवस के दोहे, बाल दिवस के लिए गीत, बाल दिवस पर अनमोल वचन, बाल दिवस पर कविता, बाल दिवस पर कविता बताइए, बाल दिवस पर कहानियां, बाल दिवस पर गाना, बाल दिवस पर छोटी सी कविता, बाल दिवस पर शायरियां, बाल मन पर कविता, हिंदी में बच्चों के लिए कविता 3 Comments »

by Brijmohan Swami

ओम पुरी जिन्दा है – बृजमोहन स्वामी

July 10, 2017 in Other

चलाओ टीवी,
भिन्डी काटती हुई अंगुली का
पसीना न पोंछते हुए
प्रेमिका को मिलाओ फोन,
बांटों दुःख
ओम पुरी चले गए,
सुनाओ निःशब्द
रो लो तीन सौ आँसू
लिखो डायरी में,
बदलो तस्वीरें
और बताओ खुद को

इतना खरा आदमी था
कि मौत में
बीमारी या दर्द की मिलावट नहीं की ऐसे आदमी को कैसे याद किया जा सकता है,
शायद उनकी पिछले सालों की
बुरी फिल्में देख कर?

काटो तो खून,
न काटो तो वक़्त
इंसान बस उतना ही होता,
जितना वह छोड़कर जाता

पर बार बार कैमरे के सामने
हल्की आवाज़ पर
ओम पुरी यह हिम्मत छोड़ कर गए
हिम्मत
जिसे हमने कभी नही परखी
गरीब और
बे-बाप लड़कों में देख सकते हैं,
और उधर मुम्बईया लोग
बार बार कुरेदते आपके सपने
“आप स्टार बन सकते हैं”

ओम पूरी एक युग थे
उम्मीद और इन्साफ़ का नेम प्लेट
डूबते दिल से
आखिरी रात,
मैंने सेट मेक्स पर
उन हाथों को सलाम किया
उन्हें चूमा,
उनकी दुनियां का आख़री साँस खिंचा
जैसे रो पड़े
मेरी माँ के हाथ…

ओम पुरी जिन्दा है
और दुनियां मर चुकी है।

om puri jinda hai, by- Brijmohan Swami

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