by Ria

खरोंच

January 3, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

अरसे बाद
वह सामने आए
मुसकराए, बात की,
जैसे कभी कुछ हुआ ही नहीं

बुत बने हम
देखते रह गए,
साँस भी न ले पाए
जैसे वक्त भी रुक गया उनके आ जाने से

कहने लगे
वक्त हो चला है
मेरे दिए ज़ख्म
कब तक दिखेंगे
भरने दो इन्हें

कैसे कह देते हम

ज़ख्म देखे कहाँ तुमने
जो देखा
वह तो खरोंच थी
लगी थी …
अभी अभी
उनके आ जाने से

 

– रिया

by Ria

रिश्ते

November 30, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जिन्हें हम याद करना नहीं चाहते
उन्हे ही भुला नहीं पाते
जो पल भूल गए हैं
उनका अहसास भुला नहीं पाते၊

आँसू जो अब तक बहें नहीं
उन्हें सुखा नहीं पाते
जो सूख चुके हैं
उनका स्वाद भुला नहीं पातें

तस्वीरे जो धुंधली नहीं हुई
उन्हे उतार नहीं पाते
जो उतर गई है।
उनके दाग हटा नहीं पातें

रिश्ते भी कितने अजीब होते हैं

जिन्हें देख परख कर बनाया था
कभी कभी
साथ रहते हुए चुभते हैं
और कभी तो
बीच राह छोड़ जाते है
मुड़ कर देखते तक नहीं၊

जो साथ बस बन जाता है
कभी कभी
वह सबसे गहरा हो जाता हैं
अपने निशान तक छोड़ेते नहीं ၊၊
– रिया

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