खुद ही से खुद ही के परिचय की तलाश में

खुद ही से खुद ही के परिचय की तलाश में,

लोग भटकते हैं दरबदर कस्तूरी की तलाश में,

यूँ तो तय हैं सभी किरदार कहानी के मगर,

हर मोड़ पर बदलते हैं चेहरे नए चेहरे की तलाश में।।

– राही (अंजाना)

Comments

5 responses to “खुद ही से खुद ही के परिचय की तलाश में”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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