Poems

” धुंधला नजारा “

मोहब्त का ले सहारा उन्हें पाने की सोची…..

ख़ुद ही बे – सहारा हो गए …..

 

जिनका अक्श कभी ओझल ना हुआ , नजरों से ….

वही आज इक धुंधला नजारा हो गए ….

 

जिन सागरों के किनारों पर रुक जाती थी ….

हमारी कश्ती – ए – चाहत ….

 

आज वहीँ सागर बे – किनारा हो गए …..

 

पंकजोम ” प्रेम “

” कसक मुसलसल है “

चलो आज बात करे गुज़रे जमाने की

मैंने जरूरत समझी आप सबको बताने की …..

 

संग उसके मुस्कुराकर समझते थे

क्या बेनज़ीर रौनक है मेरे काशाने की ….

 

इक मरतबा भुला ही दिया ख़ुदा को

बड़ी ख़ुशनसीब जिंदगी थी इस दीवाने की …

 

बेसूद हुआ एक एक अल्फ़ाज़ मेरा

जब कोई राह ना दिखी उसे मुझे चाहने की…..

 

वो इस क़दर रुसवा हुए मुझ से

की इक बार भी ज़रूरत ना समझी लौट आने की …

 

वो दिल से एक दफ़ा अपना कह देते

तो आज ग़ैरों से जरूरत न होती कहलवाने की…..

 

कल मोहब्त भरी निग़ाहों से तराश लेते हमें

तो आज ज़रूरत ना होती नज़रे चुराने की….

 

 

  1. ये  दौर – ए – इखलास सदा क़ायम रहेगा ” पंकजोम ” प्रेम

बस कसक मुसलसल हैँ इंसान बदल जाने की……

 

पंकजोम ” प्रेम “

” अपनी क़ीमत “

अज़ीब समझ हैं अपनी ….

 

हम अपनी क़ीमत जानने से कही ज़्यादा ….

 

अपनी क़िस्मत जानना चाहते हैं….

 

पंकजोम ” प्रेम “

“सितम” #2Liner-26

ღღ__जो तुम कर रहे हो “साहब”, सितम की इन्तहा नहीं तो क्या है;
.
कि दूर भी जा रहे हो मुझसे, वो भी ज़रा-ज़रा कर के !!………‪#‎अक्स‬

समझने को दुनिया ने क्या क्या हमें समझा

समझने को दुनिया ने क्या क्या हमें समझा
जो न समझना था, लोगो ने वही समझा
देख के दुनिया की समझदारी, हम यही समझे
जो न कुछ समझा यहां, वही सब कुछ समझा|

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