Poems

गीत-ये मत सोंचो

ये मत सोंचो

एक कलम के बूते पर मैं दुनिया रोज बदलता हूँ ।
ये मत सोंचो कवि हूँ मैं तो बस कविता कर सकता हूँ ।।

ठेले पर सपनो की दुनिया, लेकर चलने वाला हूँ ।
मैं सूरज के साथ गगन के, पार निकलने वाला हूँ ।
सागर को तो एक घूँट में, पीने का दम रखता हूँ….
ये मत सोंचो कवि हूँ मैं तो, बस कविता कर सकता हूँ ..।।

मेरी कलम सितारों को भी, आँख दिखाती चलती है ,
दिल के पन्नों के भीतर भी, एक नदी सी पलती है ।
चिंगारी लेकर आँखों में, खुद भी बहुत झुलसता हूँ…
ये मत सोंचो………….।।

रोज इरादों की रेतीली, मिट्टी को चुनता रहता ,
बीज नई आशाओं वाले, मन ही मन बुनता रहता ।
मैं अतीत का व्यापारी हूँ, कल की खेती करता हूँ……
ये मत सोंचो……..।।
राहुल द्विवेदी ‘स्मित’

मनहरण घनाक्षरी

मनहरण घनाक्षरी

रण में लड़े जो सदा, शत्रुओं से डरे बिना
वीरों में भी वीर ऐसे राणा अति वीर थे ।
धर्म देश जाति नीति, का सदैव मान रखे
त्याग तप ज्ञान बुद्धि, की बड़ी नज़ीर थे ।
शत्रु हेतु रूद्र रूप, काल से कराल अति,
सुजन प्रजानु हेतु, मलय समीर थे ।
आन बान शान हेतु, राष्ट्र स्वाभिमान हेतु
सूर्य से भी तेजवान, राणा सूरवीर रणधीर थे ।।
राहुल द्विवेदी ‘स्मित’

“डर लगता है!!”

“डर लगता है!!”

ღღ__जब दर्द भी दर्द ना दे पाए, तो डर लगता है;
आशिक़ी हद से गुज़र जाये, तो डर लगता है!!
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डर लगता है अक्सर, किसी के पास आने से;
पास आके वो गुज़र जाये, तो डर लगता है!!
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कुछ ख्वाहिशें बेशक़, मर जाएँ तो ही बेहतर है;
कुछ ज़रूरतें यूँ ही, मर जाएँ तो डर लगता है!!
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इक बार कहा था उसने, आशिक़ी बे-मतलब है;
ये मतलब गर समझ आ जाये, तो डर लगता है!!
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कोई ऐसा भी घाव होगा, जिससे मरने में हो मज़ा;
जो वही घाव भर जाए ‘अक्स’, तो डर लगता है!!…..‪#‎अक्स‬

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The Burning Candle

Pitch dark night
A candle stands upright
Slowly burning down
Light and smoke around
Look there no more
Where did it go?

It has changed garb
Now in the new box
So I was told
By the man down the road
That is a delusion
There is an explanation

It changed state
That much is science
There is more however,
Than meets the sight
It was a solid apparition
Of the Universe in creation

The Universe is still around
Only the image not to be found
Everything is a unique one-time event
Yet fused with the eternal moment
Moment goes on moment to moment
Accumulations of causes ever present

The dance of life goes on
Causes and effects on and on
To what can one latch on?
Fulfil your purpose, move on
To your purpose be true
And that purpose is ‘You’

‘You’ :The true-honest-to-goodness you
What the sage called ‘Mystic’ or ‘Myo’
Favourable causes—favourable results
Is your best chance
Greater the goodness in the Universe,
Greater the  possibility of happiness
In both the living and the eluding
Such are ‘Well Gone’

मेरे हाथ

मेरे हाथ, मेरे दिल की तरह
कांपते हैं, जब मैं
उन सलवटों को अपने भीतर समेटती हूं

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