Poems

किया प्यार तुमसे

किया प्यार तुमसे, मैं करता रहूँगा।
रस्म- ए-वफा को निभाता रहूँगा।। किया…….
सूरत तुम्हारी मैं दिल में बसाई ।
अपना बनाने की चाहत है आई।।
मिलो न मिलो मुझसे बुलाता रहूँगा।
किया प्यार तुमसे मैं करता रहूँगा।। किया…..
छुप-छुप के देखूँ यही चाह मेरी।
कहीं भी रहो खुश नहीं आह मेरी।
हरेक गम मैं तेरा उठता रहूँगा।
किया प्यार तुमसे मैं करता रहूँगा।। किया,,,,
‘विनयचंद ‘लग जा गले यार मेरे।
किया मैं कबूल अब तो तुझे यार मेरे।।
सातो जनम तक संग-संग रहूँगा।
किया प्यार तुमसे मैं करता रहूँगा।। किया……
मैं भी अब तेरे संग संग रहूँगी।
किया प्यार तुमसे करती रहूँगी।। किया……

नादान

वक्त वक्त पर वक्त का इम्तेहान लेते हो,
तुम इस नादान से कितना काम लेते हो।।।
राही अंजाना

बच्चा

एक बच्चा,अपने मन से कुछ बनना चाहता था
पर मां-बाप की ही उस पर चलती रही.

जैसा हम कहते हैं वैसा ही करो
और उसकी इच्छाएं है यूहीं आग में जलती रही.

ख्वाब टूट गए उसके तो हकीकत में क्या जिएगा
यही सोच उसके दिल और दिमाग में चलती रही.

ख्वाब उसके टूट चुके थे
रिवायत ये बचपन से ही चलती रही.

वह तो कई साल पहले ही मर गया था
पर लाश पचपन तक चलती रही.

इतना हो कि

इतना हो कि

🌹इतना हो कि 🌹

इतना हो कि
मेरी यादें तुम मिटा दोगे
ये बात खुद को मै समझा सकूँ ||

इतना हो कि
तुम बिन मैं जीवन को अपने
पूरी तरह से कभी पा न सकूँ ||

पत्थर की दीवार जैसा
मन-जिगर बनाए तुम्हारी आरजू से
तुमने ही सौंपी फूलमाला तहसनहस कर सकूँ

इतना हो कि
सुख के बदले दुःख भुला न सकूँ
बेवफाई से और बड़ा कोई दुःख न पाऊँ

इतना हो कि
किसी का किसी के लिए रुकता नहीं
ये अपने आप को मैं समझा सकूँ

—–चारुशील माने (चारागर)
🌹

दुआ

आते नहीं मुझसे मिलने
तुम हमसे अक्सर ये गिला किया करते
छोड़ दिया है उन गलियों में जाना
जिनमें हम कभी मिला करते थे
चाह कर भी तेरे दर पे ना आ सके
तेरी सलामती की हमेशा दुआ करते थे
बदनाम ना हो जाओ तुम कहीं
मन ही मन डरा करते थे

Page 3 of 164212345»