Poems

…….गुज़र जाएगा…..

( दुनियां )
एक सोच में डूबी हूँ
क्या करूँ और किस काम को छोड़ दूं….
महाकाल , भयावह काल , कोरोना काल का यह समय किस तरफ़ मोड़ दूँ…..
समय माँगे जा रहा है फ़िर से समय
रुको वहीं , थोड़ा थम जाने दो
बुरा वक़्त है….. अपने समय से ये भी पलट जाएगा
गुज़र जाएगा….. ये मुश्किल समय भी नई खुशियां लाएगा…..

( डॉक्टर )
होते ना आप सब साथ , जंग शुरू में ही हार जानी थी
जुड़े हाथ से हाथ और क़िस्मत को एक नई कहानी बनानी थी….
सेवा भाव करते करते भी हमारे फ़रिश्ते ( डॉक्टर ) भाव -विभोर हुए ,
इस जंग को लड़ने के ख़ातिर ,…..अपने परिवार नन्हें बच्चों से भी दूर हुए….
इस जुदाई का परिणाम भी भाग्य अच्छा ही दे जाएगा
गुज़र जाएगा……ये अंधेरा भी जल्दी ही सफ़ेद रौशनी से डर जाएगा……

( नर्स )
माँ की ममता की दुलार आपके ही आँचल में मिली…..
इतनी नन्हीं जिंदगी , आपके हाथों से आपके हाथों में खिली…
इंजेक्शन – दवा आप ना होते तो कैसे हम कर पाते….
बेजान कमरों की दीवारों में कैसे ममता का अक्स देख पाते….
आपके कारण ही विश्वास है…..14 -21 दिनों – महीनों के सफ़र हमारा , आपसे ही संवर जाएगा…..
ये पल , ये समय ……गुज़र जाएगा…… माँ की ममता से ऊपर ममता देख ये भी बिख़र जाएगा……

( पुलिस )
बलशाली आप , बल दिखा दिया पूरा दुनियां को फ़िर एक बार…
समझाया प्यार से…..रहों घर में….. न होने देंगे हम दूर तुम्हारा घर- बार
देश की सीमा पर जवान , देश में रहते हुए आपका बलिदान….
18 -18 घण्टों की ड्यूटी से देश का प्रत्येक नागरिक रहेगा आपका कर्जदान….
ख़ाकी वर्दी में आप बलशाली …..कलियुग के हनुमान में आपका ही नाम आएगा….
पलट जाएगा.…..आपके साहस से यह दुखमय समय सुखमय में बदल जाएगा……

( सफाईकर्मी )
ना होते आप तो , पर्यावरण को स्वच्छ कौन इतना रख पाता
मुश्किल दौर में कौन बिखरने से हमको संभाल पाता….
मुँह पर मास्क , पीठ पर सैनिटाइजर रख कौन कर्मठता दिखाता….
देश साफ़ रहता क्या …..या इंसान कूड़ों के ढेर सा बिखर जाता….
आपके ही कारण …..देश सुंदर बन पाएगा…..
बदल जाएगा……. साहस से आपके हर गली हर मोहल्ला संवर जाएगा……

( सेवा भाव रखने वाले )
देश हित में लगे आप नोजवानों….
आपका कर्म भी आपको समय मीठा ही दे जाएगा….
सेवा भाव बनाए आप सभी पर
यूहीं बातों ही बातों में आपका नाम जरूर याद आएगा…..
चूक जाएगा…… कोरोना महामारी का तीर भी आपके सीने का जोश देख मुकर जाएगा…… ये मुश्किलों का दौर भी चला जाएगा…..

कुछ चीज़ें भी फ़िर पटरी पर आएगी
वीरान गलियां भी फ़िर ख़ुशनुमा हो जाएगी
विश्वास के जब 130 करोड़ ताल मिलेंगें
जन विश्वास के जब 130 करोड़ दीपक जलेंगें
कोरोना जल्दी ही उसमें जल ही जाएगा…..
थम जाएगा….. ये क़हर भी क़ुदरत का थम ही जाएगा…..

जो खो गई थी मुस्काने चेहरों से
अब देखना बढ़ कर वापिस आएगी
” आत्मनिर्भर ” की नई रणनीति देश का तिरंगा
गर्व से शान से सबसे ऊँचा लहरायेगी….
मास्क से मुँह ढका है पर,
चेहरे की मुस्कुराहट का अब आँखों से पता चल जाएगा….
समय बड़ा बलवान है….. और बलशाली हमें भी बना जाएगा…..
चला जाएगा….. ये मुश्किलों का दौर भी चला जाएगा।।

जय हिंद ……..वंदे मातरम ।।।।।।।।।।

By :- Vaishali Goyal

शहीदों को नमन

“आजादी के मतवाले हँसकर फंदे पर झूल गये,
बोलो उन वीर सपूतो को हम सब कैसे भूल गये।
मंगल पांडेय ने देखो आजादी का बिगुल बजाया था,
टोली संग अपनी अंग्रेजो को खूब मजा चखाया था।
रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजो के छक्के छुड़ा दिये,
अपनी तलवार से जाने कितने दुश्मन मिटा दिये।
आजादी की परिभाषा चंद्रशेखर आजाद सिखा गये,
अल्फ्रेड पार्क मे न जाने वह कितनी लाशे बिछा गये।
ऊधमसिंह सबको स्वाभिमान से रहना सिखा गये,
जलियावाले का ले बदला डायर को मजा चखा गये।
सुभाष चन्द्र बोस शान से ‘जय हिंद’का नारा लगा गये,
सम्पूर्ण विश्व को सेना का अनुशासन व महत्व सिखा गये।
भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु के भी अंदाज निराले थे,
ये सब वीर सपूत भारत की आजादी के सच्चे दीवाने थे।
अशफाक खाँ ,राजनरायन मिश्र आजादी की राह दिखा गये,
कर आहुत अपने प्राण वो भी शान से तिरंगा फहरा गये ।
मोहम्मद इकबाल इस देश की शान से शौर्य गाथा गा गये,
‘सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’ ये सबको बता गये।
ये देश प्रणाम उन वीर सपूतो को आज भी प्रतिपल करता है,
जो आजादी दिला गये उनको नमन देश यह करता है।”

हम सिपाही है….. सिपाही ही रहेंगे…..

….हर तरफ़ एक शोर है…..हर तरफ़ एक ही बात,
मुल्क़ के लिए अपनी जान जो दे गए,
यथासंभव हमें देना हैं मिलकर उनके परिवार का साथ…..
जोड़ सकते है हम अगर एक लहर को तो
जोड़ेंगे दिन और चाहे रात,
वापिस तो नहीं ला सकते अपने शहीदों को
पर मिटा भी नहीं सकते उनके अपनो के दर्द भरे जज़्बात…..
हमारे लिए वो लड़े जिनके वो बैरी नहीं
टुकड़ों में बिखर गया अब उनका शरीर , बिखरे है वो कहीं कहीं,
मुल्क अपना है लोग अपने है पर ,
अपनापन बस वहीं निभाते हैं….
क्या कैंडल मार्च या स्टेटस पोस्ट करने से कुछ होगा
बॉर्डर के इस पार पुतले फूँक फूँक कर ,
असली आतंकवाद तो हम आप जग जाते है….
एक बेटे , भाई, पति, पिता की कमी को ,
क्या अब कोई पूरा कर पाएगा ?
फ़िर भी उस माँ – बाप का कलेजा देखो ,
हमारे एक बेटे की शहादत का बदला लेने,
हमारा दूसरा बेटा भी बॉर्डर पर उनसे लड़ जाएगा….
तुम्हारी शहादत का बदला लेने ,
क़ाश अब देश पूरा एक जुट हो जाए….
अच्छे दिन तभी अच्छे लगेंगे ,
जब एक रोती माँ के आँसू ,
वापिस खुशियों में बदल जाए
वापिस खुशियों में बदल जाएं…………

हम सिपाही है… सिपाही ही रहेंगे,
जिंदा हैं या शहीद हुए ,
अपने वतन की रक्षा हमेशा करेंगें……।।

जय हिंद जय भारत…….

ललकार

देखो चली नौजवानो की टोली।
खेलेंगे लाल फिर लहू की होली।।
चारो दिशाओं में गूंज रहा है।
इंक़िलाब जिंदाबाद की बोली।।
अग्निपथ पे चल पड़े है सपूत।
ललकारे छोड़ के आसमां में गोली।।

मां का सर्मपण

एक बार मां बीमार पड़ी हफ्तों उपवास
जब जिद करके मैंने एक निवाला उठाया
मेरे हाथ बीच में ही थाम के
उसने पूछा दबी आवाज में
पापा ने खाना खाया?
पापा को आदत है अक्सर थाली में छोड़ने की
मां उसे प्रसाद समझ शिद्दत से खा जाती

मैंने कभी कभी उनको लड़ते देखा है
माँ को मीठी घुडकियां देते देखा है

देखा नहीं पापा को कभी
मां की थाली से खाते हुए
सुनो मैं वादा करती हूं
हमारा होगा
एक घरौंदा
एक थाली
एक दर्द
एक हंसी
और
एक हम

वादा👩‍❤️‍👨

पूजा मिश्रा मध्यप्रदेश

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