Poems

पाक़ दिल

लफ़्ज़ बिकते हैं इमान बिकते हैं जब बिकने पर आये तो क्या-क्या बिकते हैं ज़माने में__

एक पाक़ दिल पिन्हां सा हैं जो दुनिया की किसी दौलत से ना पिघलता हैं ना बिकता हैं गालिबन मैं मालामाल हूँ उस दौलत से__

-PRAGYA-

मजबूर दिल

उसकी बेवफ़ाई पर हंसी आती हैं तो तरस भी__

अभी अन्जान हैं वो मोहब्बत से..दिवाना कुछ इस कदर हैं समझ लेता हैं वो हर पत्थर को कोहिनूर भी__

कभी मुलाक़ात ज़रूर होगी इज़हार-ए-मोहब्बत करने वाले अपनी झूठी नज़रों से हम पर क़रम ज़रूर करना_

कहीं नज़रें झुक गई फिर दिल में हमारी तमन्ना भूल कर भी मत करना_

-PRAGYA

नाराज़गी

उसकी बेवफ़ाई पर हंसी आती हैं तो तरस भी__

अभी अन्जान हैं वो मोहब्बत से..दिवाना कुछ इस कदर हैं समझ लेता हैं वो हर पत्थर को कोहिनूर भी__

कभी मुलाक़ात ज़रूर होगी इज़हार-ए-मोहब्बत करने वाले अपनी झूठी नज़रों से हम पर क़रम ज़रूर करना_

कहीं नज़रें झुक गई फिर दिल में हमारी तमन्ना भूल कर भी मत करना_

-PRAGYA

बेवफ़ाई

उसकी बेवफ़ाई पर हंसी आती हैं तो तरस भी__

अभी अन्जान हैं वो मोहब्बत से..दिवाना कुछ इस कदर हैं समझ लेता हैं वो हर पत्थर को कोहिनूर भी__

कभी मुलाक़ात ज़रूर होगी इज़हार-ए-मोहब्बत करने वाले अपनी झूठी नज़रों से हम पर क़रम ज़रूर करना_

कहीं नज़रें झुक गई फिर दिल में हमारी तमन्ना भूल कर भी मत करना_

-PRAGYA

एहसास-ए-ज़िदगी

ऐसा कोई लम्हा नहीं गुज़रता जब सांसों से मेरी उसकी यादें ना गुज़रती हो__
ये बात और हैं एहसासों से मेरे वो अंजान हैं मगर हालात-ए-जिस्त ये हैं की वही ज़िन्दगी हैं मेरी वही अरमान हैं-
-PRAGYA-

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