Poems

दिल ए नशाद!

ली गया दिल ए नशाद! मुझे
जाने कहाँ
जब एक निगाह उसने कर दी
मेरी तरफ

रहने देंगे

रहने देंगे हम तुम्हें लोगों के करीब
तुम खुमार में रह लो थोड़ा शरीक

जैसा कहिये

जैसा कहिये वैसा करिये
ऐसे लोग जहां में कम ही होते हैं
अपनी कथनी और करनी में
जो कोई फर्क न करे ऐसे लोग
बड़ी मुश्किल से मिलते हैं

मिठे बचन बोले

मिठे बचन सदैव बोलिए,
सुख की उत्पत्ति होय ।
बसीकरन मंत्र जाप करें,
जग का सदा हित होय ।।

महेश गुप्ता जौनपुरी

रमता जोगी

रमता साधु का जात ना पुछो,
पुछ लो ज्ञान की बात ।
तलवार के वजन को ना आंकिए,
जोरदार घाव से करें बात ।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

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