हे भगवान ये लाकडाउन हटा दो, नहीं तो ये कोरोना मिटा दो । तंग आ गया हूं फोन उठाकर झूठ सुनते -2, ये कमीने दोस्तों का मोबाइल ब्लास्ट करा दो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हे भगवान ये लाकडाउन हटा दो, नहीं तो ये कोरोना मिटा दो । तंग आ गया हूं फोन उठाकर झूठ सुनते -2, ये कमीने दोस्तों का मोबाइल ब्लास्ट करा दो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खुलीआंखों से हमने भी ख्वाब देखें, तेरे चेहरे पर हमने भी जज्बात देखें । सुना था आंधी कुहासे को उड़ा ले जाता है, दो टूटे हुए दिल को कांटेदार गुलाब मिला देता है।। ✍महेश गुप्ता […]
रोज मर्रा की जिंदगी में, बहुत कुछ सीखा हैं हमने। दुनिया में ना जाने कितने हैं रंक, जीवन पर लगा यह कैसा अभिशप्त का कलंक।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हम गरीब सही तू अमीर सही मगर तेरे घर की रोटी मेरे ही खून पसीने से आती है ।
प्यार का तोहफा खरीदने में वक्त तो लगता है, सच्चे प्यार को बंया करने में वक्त तो लगता है, दिल से दिल का तार जोड़ने में वक्त तो लगता है, प्यार को इजहार करने में […]
आतंकवाद के जड़ों में पानी डालो करके गर्म, हिन्दू मुस्लिम कहकर बरगलाने वालों को दो सजा। मजहबी बनकर जो फैलाते है आतंक दो सजा, फांसी के फंदे पर लटका कर आंख नोंचकर दो सजा।। ✍महेश […]
कोरोना के डर से सारी दुनिया कांप गयी, चीन के दोगलेपन चाल को दुनिया भांप गयी। एक एक भयानक शहर को कोरोना निगल रहा, कोरोना के आतंक से देश दुनिया सहम रहा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बदल सको तो बदल दो कानून व्यवस्था को, फांसी पर लटका कर मारो बहसी दरिंदों को। कब तक आस लगाकर हौसला बढाओंगे दरिंदों का, उदय से पूर्व मिटा दो मिलकर खेल बहसी दरिंदों का।। ✍महेश […]
जिसने हमको छेड़ा हमने कभी उनको छोड़ा नहीं, बातों बातों में धूल चटाया कान कभी मरोड़ा नहीं। दख़ल दिये जो मेरी जिंदगी में समझा उनको रोड़ा नहीं, तोड़ कर दुश्मन के बदन की हड्डी को […]
काम गिनाए गिनाने दो, काम को बस परख लो। हाथ जोड़े जोड़ लेने दो, जलील करना बस सीख लो।। महेश गुप्ता जौनपुरी
जाग उठा था आशा आजादी के परवानों का, वीर बहादुर भगत सिंह जब अंग्रेजों को ललकारा था। कतरे कतरे खून के बूंद का यही नारा था, हिन्द की धरती हिन्दुस्तान भाईयों को बहुत प्यारा था […]
देख महेश जग की काया, सकल विश्व जग की माया। हुआ अचेत देख महामारी, कोरोना प्रकोप सब पर भारी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खाने को अब अन्न नहीं, मरते बिलखते लोग । कोरोना के संकट में पड़कर, जान गंवाये सब लोग।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जान हमारा हर लिजिए प्रभू, नहीं बचा अब जीने का राह। कोरोना के भारी संकट से, आंख के आंसू सुख गये प्रभू।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जिंदगी ये मेरी जिंदगी मुझे क्या से क्या बना दिया। इस लाकडाउन में जीना मरना सिखा दिया।। उम्र में पहली बार सुकून के पल दे दिया । परिवार के संग हंसने खेलने का वक्त दे […]
शरजिल इमाम को देशद्रोही घोषित किया मगर C A Aपर कोई बड़ा फैसला अभी तक नहीं किया गया है क्यो इतनी देरी हो रही है इनको फासी की सजा सुनाने में?
डूब जाना तो आसान है मगर डूब कर पार होना बड़ा मुश्किल ।
चप्पे-चप्पे पर नज़र रखता हूँ मैं तो कश्ती हूँ जो हर दरिया पार करता हूँ ।
मोहलत कम दी है खुदा ने तुझे मनाने की पर तुझे तो आदत है बिन वजह रूठ जाने की ।
गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है
गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है
अफसोस नहीं होता है मुझे तेरे दूर जाने का मै तो शुक्र गुजार हू तेरे बेवफ़ा हो जाने का
सोचता हूँ मैं कि कब आयेगी बहार बगिया में? कब महकेंगे सुगंधित सुमन दिल के आँगन में?
अपनी मासूमियत पर भी शक करते हैं लोग हम जो पानी भी पियें तो शराब कहते हैं लोग ।
मैं अपने फ़ैसले खुद लेता हूँ और कोशिश करता हूँ कि उन फैसलों पर कभी पछताना ना पड़े ।
इरादा बुलंद रखता हूँ मेहनत खूब करता हूँ ऊपर वाले की मोहलत के हिसाब से सब करता हूँ ।
मैं खुद बनाता हूँ रास्ते अपने दूसरों के इशारों पर नहीं चला करता।
बाजुओं में दम रखने वाले मुकद्दर से नहीं डरा करते।
कितना गरूर था डगर को अपने लम्बे होने पर लेकिन एक गरीब के हौसले ने उसे कदमों में नाप दिया ।
बेसुध हो पड़ा है ंमजदूर जमीं पर ओ खुदा! थोड़ा तो रहम कर इस पर
मैं जब भी जीता हूँ अपनी मेहनत से कभी किस्मत से नहीं किस्मत से बस हारा हूँ ।
लिख कवि लिख कवि लिख भावनाओं में बहकर लिख खुशीयों में फूदक कर लिख दर्द आह महसूस कर लिख तन्हाई को साथी बनाकर लिख लिख कवि लिख अफसर का रौब लिख नेता की बेईमानी लिख […]
महंगाई का दास्तान लिहली थैला पांच सौवा नोट खरीदे निकली सब्जि और तेल सब्जि में हि खत्म भईल पांच सौवा बड़का नोट कक्का के सुरती रही ग बुढवा बाबू के तम्बाकू टहल टहल बजारे हम […]
वफादारी देश हित में कुछ काम करो भारत मां को जंजालों से आजाद करो अपने विचारों से योगदान करो करके श्रम देश में सहयोग करो जाति धर्म को भूलकर इंसान बनो अपने देश के लिए […]
संस्कार बदलते दौर के साथ बदल गया संस्कार पैसे की होड़ में बिक कर रह गया संस्कार पैर छूने की परम्परा है विलुप्त के कगार हाथ जोड़ अभिवादन का चला है संस्कार मां बाप के […]
टिड्डियों पर फिसड्डी हुआ पाक करता है जंग की बात पाकिस्तान में इन दिनों टिड्डियों के आंतक से खड़ी फसलें चौपट हो रहीं हैं टिड्डियों का आंतक इस कदर बढ़ गया है कि जिस तरफ […]
बड़े बड़े भामाशाह और उद्योगपति का संस्कार को मार दिया कोरोना ने मति सोनू सूद नमन है आपके प्रेरणा को मजदूर के हातालो को बखूबी समझा महेश गुप्ता जौनपुरी
आरक्षण वाली चाय की दुकान मैंने मन ही मन एक प्लान बनाया आरक्षण वाला चाय का दुकान खुलवाया दुकान के अंदर तीन सिट बनवाया अलग अलग कैटगरी को अलग बैठवाया जनरल ओबीसी एससी एसटी का […]
वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ आंदोलन को चलाना है, वृक्षारोपण से धरा को हरा भरा बनाना है । मिलकर आओ सभी धरा के प्रकृति प्रेमियों, वृक्ष कटने से हम सभी प्रहरी को बचाना है।। महेश गुप्ता […]
नयन की भाषा सब कह जाते, वाणी भले ही बात छिपाते । प्रेम उपज को कोई बांध ना पाये, टूटते रिश्ते भी दर्द में प्यार पाते।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
वियोग स्वीकार करके हार ना मानो, प्यार में अपने आप को मार ना डालो। हे प्रियतमा मेरे बातों को तुम समझो, खुद को तड़पा कर अब जान ना लो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ज्ञानी को ज्ञानी बनने दो, व्याधान वालों से सावधान रहों। बहुत मिलेंगे ज्ञानी राहों में, अपनी सुर में सबको बहने दो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नयन पर ही करते विश्वास सभी, जीवन के सारे घटनाओं पर । लड़कर हमें अब जीतना होगा, संसार के सारे समस्याओं पर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मोह माया के चक्कर में पड़कर, ना करो ज्ञान की धारा को चौपट । सिखों और सिखाओ समाज को, ना करो अपने ज्ञान से तुम कपट।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
अकेले रहकर पशु पंक्षी बनकर नहीं जीना, इंसान बनकर इंसानियत से है राह दिखाना। मान गये तो गले लगाकर समाज का करेंगे उध्दार, नहीं तो मुंह तोड ज़बाब देकर है सबक सिखाना।। महेश गुप्ता जौनपुरी
इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा, बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा। जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये बैठे, करनी कथनी के चक्कर में जलता दिया बुझा रहा।। […]
इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा, बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा। जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये बैठे, करनी कथनी के चक्कर में जलता दिया बुझा रहा।। […]
राज की बात बताऊं मैं एक, शेर के खाल में बैठा भेडीयां। दो शक्ल लिए घुम रहा है, बनकर देखो कोई बहुरूपिया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नर नारी के वेष में आया कोई छलिया, तन मन को करके वश में ठगा मुझे ठगिया। अन्तर्मन के लिलाओ से बनाया भेष अद्भुत, मग्न होकर अपने अधर्म के बल से नाचे भेड़िया।। 🙏महेश गुप्ता […]
आंखों के सामने घुम रहे हैं भेड़िया, सोच समझ के परख लो ऐंसे छलिया। बकरें के संग बकरा बनकर कब तक खेलोगे खेल, उठा कर डण्डा पीटकर छुड़ा दो अपना गलियां।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
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