कोरोना के प्रकोप से बिलख रहें है लोग, ऐंस की जिंदगी खत्म हुआ समझो सब लोग। भूख आज कल भटक रहा सड़कों के किनारे, क्या थे क्या हो गये इस महामारी में हम लोग।। ✍🏻महेश […]
कोरोना के प्रकोप से बिलख रहें है लोग, ऐंस की जिंदगी खत्म हुआ समझो सब लोग। भूख आज कल भटक रहा सड़कों के किनारे, क्या थे क्या हो गये इस महामारी में हम लोग।। ✍🏻महेश […]
भूख आज कल दम तोड़ रहा, पेट का भूख लोगों को मरोड़ रहा। फिर भी बाज ना आ रहे हैं, देखो लोग घर बार झोड़ रहे हैं।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
गम बटोर लाई है चांदनी रातें और फुर्सत ही नहीं देती है तेरी दर्द की आहे तेरे दिए दर्द ंंमुझको बार-बार याद आते हैं
मान गया जीवन एक मोमबत्ती है, आशा विश्वास का दीपक जलाती है, खुद के बदन को पिघलाकर वह खुशियां घर घर बांटती फिरती है ।।
नारी त्याग है बलिदान है, नारी समर्पण की परिभाषा है, नारी मां बहन बेटी और माता हैं, नारी जग में भाग्य विधाता हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अपने शब्दों में बयां करो नारी का गुणगान, नारी के दुःख दर्द को समझो ना महान। नारी को इज्जत दो करो तुम सम्मान, नारी हित में मोर्चा कर बांटो जग में ज्ञान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सच सभी जानते हैं क्या है बस तेरी ही आंखों पर पट्टी बंधी है क्योंकि तूने जो अहंकार की पट्टी अपनी आंखों पर बचपन से बांध रखी है वह कभी हटाने की कोशिश ही नहीं […]
सोच विचार से निकलेगा, आज कल का परिणाम। चिंता फिक्र से ही उपजेगा, आज कल का इतिहास।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सच सभी जानते हैं क्या है बस तेरी ही आंखों पर पट्टी बंधी है क्योंकि तूने जो अहंकार की पट्टी अपनी आंखों पर बचपन से बांध रखी है वह कभी हटाने की कोशिश ही नहीं […]
दिन प्रतिदिन हम यहीं है करते, नारी को देते उच्च स्थान । घर की लक्ष्मी मानते, करते सुबह शाम गुणगान।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
कोरोना जैसी महामारी में, कर लो पुण्य प्रताप । बांट कर खाने का पैकेट, कवि जी बन जाओ तुम भी महान।।
सब पूछते हैं मेरा हाल कैसा है मैं क्या जवाब दूं तेरा नाम बदनाम हो जाएगा क्योंकि तूने ही तो मुझे बर्बाद किया।
पुण्य का हिसाब देकर नहीं बनना पाप का हकदार, अवगत इतना बस कराता चाहता। सैकड़ों लोगों का किया भूख से निदान, तुम भी आगे बढ़कर करो कुछ पुण्य प्रताप।। महेश गुप्ता जौनपुरी
सच को आईना ना दिखाईए, झूठ को दो खदेड़ भगाय। मित्र बन्धू को दो तुम जगाए, कुछ दान पुण्य करके बन जाये सहाय।। महेश गुप्ता जौनपुरी
बहुत मशरूफ है हम अपनी जिंदगी में पर कभी-कभी वक्त निकाल लेते हैं तुम्हारे लिए तुम्हारे पास भी थोड़ा समय हो हमारे लिए तो हमारे दिल की धड़कनों को कभी कान लगाकर सुनो तो वह […]
भीड़भाड़ में उलझ कर, मैं अपना अस्तित्व खो दिया हूं। शहर में आकर मैं भूल गया हूं, मेरे यार मेरे दोस्त बता दो मैं कौन हूं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे गांव की मिट्टी में रोश बहुत है, लोगों में भाई चारे का प्यार बहुत है। सोंधी महक मिट्टी की याद आती है, मेरे गांव के युवाओं में जोश बहुत है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मत मांग मुझे मैं अब हो गया हूं खाली, पहले जैसे नहीं रह गये मेरे गालों पर लाली। थक हार बेचैन सा हो गया हूं मैं दोस्त, अब मैं घास छीलने वाला लगने लगा हूं […]
सब कुछ न्योछावर कर दिया, अब तो बख्स दे मुझे । रहम करके मेरे ऊपर दोस्त, अब मत मांग मुझे ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दोस्त ने ही दोस्त को मार डाला भरे बाजार में और दोस्त देखता रहा कुछ करना पाया अपने दोस्त की निर्मम हत्या देखकर होठों को सिला ही रखा
मेरे गांव का मिट्टी मुझे बुला रहा है, मेरे गांव का झप्पर मुझे याद आ रहा है। मेरे मां के हाथों का ब्यंजन और लोरी, मेरा गांव इशारों इशारों में मुझे बुला रहा है।। ✍महेश […]
गाय की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है उसमें हजारों देवताओं का वास होता है और गाय का मांस खाना बहुत ही बड़ा पाप है तो गाय की सेवा करें क्योंकि वही है जो बिना […]
बचा लो अब अपना अस्तित्व, गांव शहर में बदल रहा है, याद कर लो गांव की सोंधी मिट्टी, अब शहर गांव को निगल रहा है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मिट्टी खजानों का अनमोल घर है, जीवन प्रदान कर रहा शहर को है। खनिज पदार्थ खाद्य पदार्थ का खजाना, मिट्टी पर ही अमीर गरीब का नजर है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बुलंदियां पाना इतना आसान नहीं तन मन से मेहनत करनी पड़ती है और खून पसीना बहाकर एक करना पड़ता है
उलझ लेने दो मुझे मुझ में ही, पता तो चले मैं कौन हूं । अपनों से खा खा कर ठोकरें, अपने आपको मैं भूल गया हूं।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
खूशबू मिट्टी की तो एक है, तड़प दिल का मित्र अनेक है। सबको याद सताता है गांव, मिट्टी के संग जुड़े प्यारे खरवास है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दौड़ खेल कर तो हम भी बड़े हो गये, जिम्मेदारीयां संग शहर में दौड़ गये। पेट की भूख शहर की याद दिला दी, इसलिए अपने वतन मिट्टी को वेबस होकर छोड़ गये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बता दो दहाड़ कर डर नहीं लगता, शेर पिंजरे से अब जख्म नहीं देता। शायद भूल गये हो तुम मैं कौन हूं, वरना बातें बनाकर कर नहीं घुड़कते मुझे है पता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बुलंदियों से पुछ लिया कौन हो तुम, शेर के भेष में कोई और हो तुम। मुझे भी जान लो ये मित्र कौन हूं मैं, अपने लिबाज़ को उठा देखो मेरे मित्र हो तुम।। महेश गुप्ता […]
इस लाकडाउन में मैं तुम और चाय है साथी, कोरोना जैसी वैश्विक महामारी है सब पर भारी। करो जतन सब मिलकर कोरोना के प्रकोप का कुछ आदमखोर इंसानों से ये दुनिया आज हारी।। महेश गुप्ता […]
मैं मजदूर हूं साहब यह सौभाग्य है मेरा, देश के लिए करना मजदूरी काम है मेरा। करते करते मजदूरी देश को समृध्द बनाऊंगा, आन बान शान का लाज रखना काम है मेरा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अभी तो तुमसे मिले थे हम, अभी तुम मुझे छोड़ चले गये। दिखलाकर मुझे सुनहरे ख्वाब, आंखों से दूर कहां तुम चले गये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अपने आस पास देखा तो जमावड़ा था ऐसे लोगों का जो सिर्फ ंमजदू का माखौल उड़ा रहे थे सहायता करने के लिए कोई नहीं ।
मजदूर ही राष्ट्र का निर्माता, इनको हम क्यों भूल गये । चन्द रूपये पाकर हम, इनको हम क्यो अलग किये।।
हमें गर्व है तुम पर, मेरे मित्र मजदूर । किस्मत को मत कोसों, हम है बहुत मजबूर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बहुत आहत हुआ हूं देख तुम्हरा हाल, एक मशाल जलाऊंगा बनकर मैं मिशाल। मजदूर नहीं मजबूर होगा करूंगा मैं प्रयास, मुझ पर भरोसा रखना मैं हूं देश का लाल।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दो जून की रोटी कमाने निकला था ंमजदूर घर वापस आया तो दर्द के सिवा कुछ नहीं था ।
चादर बांट हौसले मुझे नहीं तोड़ना, मजदूर भाई मुझे तुम्हारा राह नहीं मोड़ना। तुम्हारे हक का हम दे सकें मेहनताना, बड़े बनकर तुम्हारा हक मुझे नहीं है छिनना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कभी झांक कर देखना मजदूर के घर, मजदूर कितना मजबूर हो गया है । टूट के बिखर कर कितना दुखी हो गया, पेट के भूख ने ही ऐंसा हाल बना दिया है।। ✍ महेश गुप्ता […]
मजदूर का दर्द कोई ना जाने बस सब बाते करते हैं वह खाता है सूखी रोटी सब माखौल उड़ाते हैं
इस संसार में ना जाने कितने चेहरे है, जिम्मेदारीयों पर बहुत सारे पहरे है। मजदूर परेशान क्यो है जान तो लिजिए, उसके किस्मत पर ना जाने कितने लहरें है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अन्तर्मन की वेदना पढ़ ना सके कोय, मजदूर की मजदूरी दे ना सके कोय। खून पसीने कौन बहता बैठ कर खाते लोग, मजदूर की मेहनत को समझ ना सके कोय।।
शान से जीना शान से मरना मजदूर की यही निशानी है। एक एक कतरे का हिसाब दे मौज में रहना ईमानदारी है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कोरोना का संकट खत्म नहीं हो रहा है और लॉक डाउन खत्म हो गया है अब तो तू ही एक सहारा है हे रघुनंदन!
कविदीप लिखों एक ऐंसा संदेश, जो मजदूरों का हक करें अदा । खून पसीने का सही मुल्य मिले, आपके लेखनी को पढ़ मजदूर हो फिदा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मजदूर है जीता शान से, देख खुशी तिलमिलाए अमीर। मजदूरी करके चैन से सोता खाट पर, मखमल का बिस्तर आराम ना दें शरीर को।। महेश गुप्ता जौनपुरी
नसीब में नहीं है उसके पीछे क्या भागना रात रात भर जग कर ख्वाइशों के जुगनू बन्द करना ।
कहानी बड़ी सुहानी है, मजदूर की बड़ी मेहरबानी है। सिना ठोंक डटे है रहता, यही तो मजदूर का ईमानदारी है।। महेश गुप्ता जौनपुरी
महल के बिस्तर चुभते रहते, धन दौलत में अमीर जीते मरते। मजदूर के जैसे खुदकिस्मत कहा, चैन से कभी कहां सोते रहते।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
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