तेरा सजदा – 38 कोई लंबे जीवन के लिए आता कोई इससे छुटकारा पाने को आता ….. यूई
तेरा सजदा – 38 कोई लंबे जीवन के लिए आता कोई इससे छुटकारा पाने को आता ….. यूई
तेरा सजदा – 37 कोई इस जन्म को तेरे पास है आता कोई अगले जन्मो के लिए है आता ….. यूई
तेरा सजदा – 36 कोई आशीर्वाद ले कर है धियाता कोई आशीर्वाद दे कर है धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 35 कोई सफेद कपड़ों में तुझे सज़ाता कोई बस खुद को ही खूब सज़ाता ….. यूई
तेरा सजदा – 34 कोई अकेले में बैठ तुझे धियाता कोई भीड़ में नाच तुझे धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 33 कोई सिक्कों से तुझे तुलाता कोई सिक्कों में खुद तुल जाता ….. यूई
तेरा सजदा – 32 कोई पक्षियों को पूज तुझे धियाता कोई पक्षियों को मार तुझे रिझाता ….. यूई
तेरा सजदा – 31 कोई ख़ुद को धागे बाँध कर धियाता कोई तुझको धागों में बाँध धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 30 कोई तुझको सब दे कर खुश होता कोई तुझसे सब ले कर खुश होता ….. यूई
तेरा सजदा – 29 कोई तरतीब से तुझे धियाता कोई बिन तरतीब तुझमें समाता ….. यूई
तेरा सजदा – 28 कोई तेरे पास रो कर आता कोई तेरे से दूर् हो रोता ….. यूई
तेरा सजदा – 27 कोई छप्पन भोग से तुझे रिझाता कोई अंग अपना काट तुझे चड़ाता ….. यूई
मेरी जिन्दगी तुम्हारी आहट खोज लेती है! कोई कली जिसतरह मुस्कुराहट खोज लेती है! हरतरफ होती हैं दीवारें सन्नाटों की मगर, मयकदों को जाम की सुगबुगाहट खोज लेती है! Composed By #महादेव
ज़नाब बदल सी गयी है जिन्दगी कुछ यूँ वक्त की दरकार में, यादों की बहार में, मिलन की दरार में ,और तेरे इन्तजार में,
ღღ__ख़ुद से है, खुदा से है या तुझ से है “साहब”; . जाने क्यूँ, इक नाराज़गी-सी रहती है आज-कल!!….#अक्स .
रात के ख्वाबों में भी उसका सहारा चाहिये, दिन के हर लम्हात में उसका इशारा चाहिये, हुजूर वो भी इन्सान है शैतान नहीं ,उसकी पलकों को भी तो दरिया का किनारा चाहिये,
वो समुन्दर भी बहुत रोता है समझ गया एक दिन समुन्दर,तू भी कितना रोता है, खारा है तू खुद में कितना , शायद इंसान से ज्यादा तू दिल ही दिल रोता है, पाया क्या तूने जो खोया होगा, की तू […]
आँखों के तहखाने ख़ामोशी के वीराने बेकसूर को लगते बेवज़ह के जुर्माने राजेश’अरमान’
मेरा रंग उड़ने लगा है, देखकर , रंग बदलना उनका राजेश’अरमान’
फुर्सत जब से ग़ुम हुई तन्हाई तब से जुर्म हुई राजेश’अरमान’
ज़िद कभी न हारने की वज़ह कभी बनती है हार की राजेश’अरमान’
इधर आग लगी है बस्तिओं में उधर जनाब तैर रहे है पानी में राजेश’अरमान’
दर्द में भी अब मज़ा न रहा क़ल्ब भी अब पाकीज़ा न रहा परियों की कहानी पर भी यकीं था, हक़ीक़त में अब मोज़ेजा न रहा राजेश’अरमान’
कुछ तो हैरान होगी ज़िंदगी भी जब हमने अपना मुँह मोड़ लिया राजेश’अरमान’
बेवफा दिल बेवफा ज़िन्दगी में किसी अजनबी से प्यार हो गया , मोहबत हुई उनसे इस कदर की ऐतबार हो गया , सुना था दुनिया में अक्सर की ये प्यार क्या है , किया जब […]
कदम रुकने से मंज़िल कुछ और दूर हो जाती है मुसाफिर की थकन से राह मजबूर हो जाती है हौसलों की हवा से उड़े है जहाँ के गुब्बारे, उड़ते गुब्बारों की दुनिया में हस्ती मशहूर […]
खुद की भागम -भाग उसपे रस्ते आग ही आग कुछ शीतल भी है अम्बर के नीचे कुछ शांति भी है अम्बर के नीचे अपने ही हाथों से हमने खुद मानव से बदल कर बना दिया […]
कुछ तो दायरे हो , जिसमे रहना जरूरी है जिस के अंदर खुद को भी रखना जरूरी है प्रगति के हम एक कारीगर है मगर वक़्त के साथ कारीगर बदलते रहना भी जरूरी है कुछ […]
कभी मन करता है फिर से दुनिया को औरों की नज़र से देखूँ शायद मेरी नज़र में कोई भ्रान्ति दोष हो एक बार देखा जब दुनिया को दूसरी नज़र से लगा आँखों पे कोई चाबुक […]
कुछ परछाइयाँ सी चलती है मेरे पीछे , वक़्त भी बहरूपिया होता है गुमाँ न था राजेश’अरमान’
डोर रिश्तों की नाज़ुक होती है कभी फूल ,कभी चाबुक होती है राजेश’अरमान’
गहरे राज़ छुपे है अपनी ही साँसों में लो तो ठंडी छोड़ों तो गर्म -गर्म राजेश’अरमान’
मेरे लफ्ज़ ग़ुलाम बन गए तेरे लफ़्ज़ों की सरफ़रोशी से राजेश’अरमान’
तेरे शिकवे कभी न हवा हो सके मेरे दर्द की तुम कभी न दवा हो सके कुछ तार बिखरे, कुछ टूट गए ख्वाब अपने कभी न जवाँ हो सके राजेश ‘अरमान’
अपनी हर सांस तो बस तेरी चाह में गुजरी तेरी सारी उम्र जमाने की परवाह में गुजरी सोचा था कहोगे उदास तुम मेरी खातिर न हो क्या कहेगा ज़माना ,फिक्र ज़िंदगी की राह में गुजरी […]
पटका तो ,कहीं दूर जा, गिरी ख़ामोशी अब खामोशियों के टुकड़े चुन रहा हूँ राजेश’अरमान’
ज़िंदगी की उधेड़बुन कबूतर गए दाने चुन राजेश’अरमान’
शरीर आत्मा में लगा कोई दीमक मन परमात्मा में लगा कोई दीपक क़र्ज़ सांसों का होता बस शरीर पर आत्मा बही-खातों में रखा कोई बीजक राजेश’अरमान’
मर गई आत्मा ,शरीर कहने को ज़िंदा है पंछी मन का उड़ गया ,आँखों में परिंदा है राजेश’अरमान’
कभी बादलों से कभी बिजलिओं से बनती है सरगम कलकल बहते पानी चलती हवाओं से बनती है सरगम इठलाती घूमती बेटियां होती झंकार बनती है सरगम अपनी साँसें भी जब सुर में हो बनती है […]
गम की फसलें सींचता आँखों की बारिश से हर ख्वाब ने दम तोडा अपनी ही गुजारिश से राजेश’अरमान’
अब मंज़िल मेरे साथ-साथ चलती है जब से बनाया मंज़िल अपने साये को राजेश’अरमान’
कोई वज़ह यूँ भी निकल आती तेरे मिलने की तारों की सजी डोली लेके आता कहार मेरे मन के द्वार मैं मन ही मन में रूप लेता निहार काश उस डोली में कोई ख्वाब सजा […]
चल पड़ा फिर जिस्म किसी राह में मन को छोड़ अकेला क्यों नहीं चलते दोनों साथ -साथ कोई रंजिश नहीं फिर भी रंजिश फूल की बगावत किसी टहनी से भवरे की शिकायत किसी फूलों से […]
रात अपना ही कोई किस्सा बन जाता हूँ दिन के उजाले में कोई हिस्सा बन जाता हूँ निकल तो जाता हूँ बाज़ारों में कहीं शाम के होते ही न चलने वाला कोई सिक्का बन जाता […]
उसकी नज़रों की तलाशी में मेरे किरदार बदले से मिले मैं ढूंढ़ता रहा उसकी आँखों में चंद कतरे पर जमे से मिलें राजेश’अरमान’
जरूरत के हिसाब से , खुद से पहचान हुई कई हिस्से अब भी अजनबी है मेरे अंदर राजेश’अरमान’
हर भोर उगता सूरज नई किरणों के संग नए खेल रचता नई ऊर्जा का संचार दिन भर तपस कभी ज्यादा कभी कम इस ज्यादा इस कम में दबे बैठे है कई प्रश्न राजेश’अरमान’
वज़ूद अपना ज़माने से जुदा रख अपने अरमानों को गुमशुदा रख परिंदे के वास्ते अर्श की सरहदें कहाँ अपने अंदर कोई दोस्त कोई ख़ुदा रख राजेश’अरमान’
पिंजरे तो खोल दिए लेकिन पंछी उड़ गया पिंजरे लेकर राजेश’अरमान’
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