बरपने लगा शोर कुछ अपने पाले सन्नाटों में कुछ उधर भी है खलबली उनके दिए काँटों में माना की कोई मरासिम नहीं उनके सायों से , अब भी मौजूं है मगर हर किसी की आहटों […]

मोहब्बत हो जाय तब देखेंगे , तेरा नाम भी लिखकर मिटाकर देखेंगे । तेरी यादों के साये जब घेरेंगे मुझे घर के चिराग बुझाकर जलाकर देखेंगे ।

काश मैंने तुमको पहचाना होता! मेरे नसीब में मेरा मुस्कुराना होता! कभी बेवसी न होती हालात की मुझको, ज़िन्दगी जीने का मुझको बहाना होता! Composed By #महादेव

दरके आइनों को नाज़ुकी की जरूरत है गर आ जाएँ इल्ज़ाम यही तो उल्फत है फासले वस्ल के यू सायें से बढ़े जाते है ये कोई मिलना या तुम्हारी रुखसत है हरसूँ बिखर गए तेरे […]

वक़्त की चाल के अंदाज़ निराले तो न थे ख्वाब ही सो गए लेके कोई करवट शायद कहाँ तो आरजुएं थी तेरे मिलने की यां तो खुद ही हिस्सों में बट गए शायद जुबान पे […]

धुंधले आईने में कोई अक्स नज़र नहीं आता वक़्त की सुईया पकड़ने से वक़्त ठेहर नहीं जाता वो चिरागों सा रोशन कभी एक नूर सा था क्या हुआ शख्स अब वो नज़र नहीं आता कहता […]

हर सांस है मुजरिम न जाने किस गुनाह में हर ख्वाईश है क़ैद न जाने किस गुनाह में न कुछ बस में तेरे न कोई डोर हाथ में जाएँ तो ज़िंदगी किन क़दमों की पनाह […]

ज़िंदगी कभी गूंथे हुए आटे की तरह लगती कभी फायदे की कभी घाटे की तरह लगती आस के फूल हर शाख पे खिलने दो टूटी आस चुभते हुए काटें की तरह लगती वक़्त की मार […]

कोई दिल का मेरे चारागर होता यूँ न तन्हा मेरा सफ़र होता आज फिर दिल ने आरजू की है घर के अंदर मेरा घर होता / वो जो रहते थे हमसाये की तरह मेरी परछाई […]

हर लम्हा गुजर गुजर कर कुछ कह गया अपनी आँखों में हल्का सा कुछ तैरता गया ज़िद जिनकी थी वो ज़िद में रह गए हाथ से उनके कोई फैसला सा गया ज़िंदगी कुनकुनी धुप तो […]

एक जरूरी दस्तावेज ही तो है जीवन न कागज़ अपना न स्याही अपनी फिर भी भ्रम अपना कहने का अपनी सासें अपनी धड़कन से विवाद करती कभी तालमेल नहीं मन से मन का फिर भी […]

मुड़े कागज़ की तरह माथे की लकीरें बन गई है मेरी किस्मत की हाथों की लकीरों से ठन गई है अपने हिस्से की गिरवी रखी उदासी को देख अब उस पे कितनी सूद चढ़ गई […]

कभी तो मेरे माजी का क़त्ल कर दिया जाएँ जख्म जैसा भी हो कुछ पल भर दिया जाएँ माना की शब की जीस्त दुआओं से है भरी हो असर ऐसा ख़्वाबों को सहर कर दिया […]

पत्थर ही पत्थर है दिल की जेब मेँ है बड़ी सच्ची मगर गर्दिशों की बात है अब के गर्मिओं मेँ ठंडक है तो हैरत किसलिए किस कदर गर्मियां थी पिछली सर्दियों की बात है किस […]

जाते जाते कुछ कह गयी ज़िंदगी समझ पाया तो ढह गयी ज़िंदगी करते गुजरा हर सांसों का हिसाब ज़िंदगी से कुछ कम रह गयी ज़िंदगी पहलूँ में लिए बैठे कई चाँद उदास जाने क्याक्या न […]

बिखरे ख्वाबों को बारहा चुनता क्या है ज़ख़्म तो जख्म है बारहा गिनता क्या है इन हवाओं से कब कोई मुड़ के देखा सेहरा की रेत पे बारहा लिखता क्या है गैर हो न सके, […]

हर चेहरे अपने पर कोई आश्ना न मिला गिला खुद से मगर कोई आईना न मिला अपनी तक़दीर-बुलंदी का क्या कहना बर्क़ को जब कोई आशियाँ न मिला फ़िज़ां मिली तो मगर खुशगवार न थी […]

सिर्फ एहसास है वफ़ा फिर छूने को जी करता है यह कौन देता है सदा सुनने को जी करता है हर शख्स का वज़ूद जुदा फितरत भी जुदा फिर भी उम्मीद वो खुद के वज़ूद […]

बुझे चरागों को हवाओं का करम न दे मेरी हस्ती मिटने का कोई भरम न दे जो गुजरा नहीं खुद , मगर आखिर गुजरा तुम फ़क़त कोई उदास सा वहम न दे जुबाँ जो है […]

मेरे सफिनों का नाखुदा हो , जो तूफानों का तलबगार न हो मुझे ऐसा चराग बना दे जो हवाओं का कर्ज़दार न हो मेरे हिस्से की हर शे पे लिख दिया तेरा नाम आखिर गिला […]