तू ही दौलत मेरे दिल कि तू ही मेरा खज़ाना है, मेरे दिल में मेरे साक़ी तेरा ही गुनगुनाना है. चलो अब देखते है फिर मुलाक़ातें कहाँ होंगी , कहीं तुमको भी जाना है कहीं […]

आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो, मैं तो झूमा हूँ, मुझे और झुमाओ यारो.. आज इतनी पिलाओ कि फिर होश न रहे, अब तो साकी से मुझे और दिलाओ यारो.. रात आधी है […]

मेरे जीवन की पुस्तक को है पढ़ पाना बड़ा मुश्किल , कि इसमें दुःख है पीड़ा है सुख पाना बड़ा मुश्किल . ये पुस्तक आज भी यूँ मीर स्वर्णिम ही रही होती , तुझे पाना […]

मुझे अब भी हवाओं में तुम्हे सुनने की आदत है , मुझे अब भी निशाओं में तुम्हे चुनने की आदत है .. मैं अब भी फ़िज़ाओं में तुम्हे महसूस करता हूँ , मुझे अब भी […]

चन्दन मेरा वजूद है लिपटे हुए हैं सांप , बेबस की ये दवा है क्या मीर किया जाये …. गुलजार करने आया था वो बागबान मानिंद , गुलसन उजाड़ कर फिर वो मीर चल दिया […]

दबी जबान में चलो आज बात हो जाये , आँखों ही आँखों में अब मुलाकात हो जाये जज्बातों में अब आबरू बची भी रहे , चलो फिर आज दिल से दिल की बात हो जाये […]

आज फिर याद में उनके आँशू बहे ,वो सलामत रहे ,हम रहें न रहें . अब तो दिन रात रहती है आँखे सज़ल ,अब तो कटती है राते यूँ सुनकर ग़ज़ल .है यही आरज़ू ये […]

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है तुझसे एक बार मैं कह दू, तू मेरी जुस्तजु है भॅवरा बनकर भटकता रहा महोब्बत ए मधुवन में चमन में चारो तरफ फैली जो तेरी खुशबु […]

अब तो उनके घर से सदायें आती हैं ,जो कभी मेरे न थे उनकी भी दुआएं आती हैं … सुना है उन मकानों में हज़ारो कत्लखाने हैं , जहाँ दिल चूर होते हैं , सलाखें […]

न मैं उसके जैसा हूँ ,न मैं तेरे जैसा हूँ , जो देखेगा मुझे जैसा ,यहाँ मैं उसके जैसा हूँ.. न मेरी जाति है कोई ,न मज़हब से है मेरा नाम, न मंदिर की मुझे […]

आज फिर कोई रो रहा है… फिर कहीं किसी किसी गली से आवाज़ आ रही है, फिर आज कोई बैठा समंदर पिरो रहा है.. आज फिर कोई रो रहा है…. फिर कहीं कोई कसक नैनों […]

आँखों से झरते आंसू ने थमकर पूछा आखिर सजा क्यों मिली मुझे ख़ुदकुशी की? दिल रो पड़ा पुराना जखम फिर हरा हुआ, कहा, गुनाह उसी ने किया जिस छत से तू गिरा .. ..atr

सफर शुरू हुआ है मगर मंज़िलें नज़दीक है… ज़िंदगी जब जंगलोके बीच से गुजरे, कही किसी शेर की आहट सुनाई दे, जब रात हो घुप्प ,चाँद छिप पड़े, तब समझ लेना मुसाफिर मंज़िलें नज़दीक है.. […]

हथियार न बन्दूक न तलवार चाहिए , इंसान से इंसान का बस प्यार चाहिए. है बंद गुलिस्ता ये मुद्दतो से मीर, इस में फकत गुल ओ बहार चाहिए. नेकी की राह बड़ी बेरहम है ना, […]

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा राहों में रोशनी के लिए न कोई आफताब रहा उनकी महोब्बत के हम मकरूज़ हो गए उनका दो पल का प्यार हम पर उधार रहा वेवफाई से […]

वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह जिंदगी हमें मिली हमेशा बस उनकी तरह फूलों के तसव्वुर में भी हुआ उनका अहसास आये वो मेरी जिंदगी में खिलती कली की तरह जब से दी […]