Tag: ज़िन्दगी पर कविता

  • ज़िन्दगी

    ज़िन्दगी

    बहुत खूब मैंने देखा जमाना

    एक शाम और एक सुबह सुहाना

    उजली सी ज़िन्दगी पे पाये

    कितने रंग मैने ।

    एक साथ होने का एक पल सुहाना

    बहुत खूब मैने देखा जमाना।

    मिर्च जैसी लगती है कभी तेरी बाते

    तो कभी तेरी एक याद

    हँसा देती है।

    मैने देखा एक पल सुहाना।

    खूब देखा तुमको बारिशो में

    लोगो को भिगाना।

    देखा है,मैने तुमको चैन से

    बैचैन होते हुए।

    अपनी आदतों से दुसरो को

    परेशान करते हुए।

    बहुत खूब मैने देखा जमाना।

    कवि:-अविनाश कुमार

    Email id:-er.avinashkumar7@gmail.com


     

  • ज़िन्दगी ना कर पाई फ़ैसला

    ज़िन्दगी ना कर पाई फ़ैसला

    मैँ शराब का नशा छोड़ दूँ

    या तेरी जुस्तजू की उम्मीद

    एक ने मुझे जीने ना दिया

    दूसरे ने मुझे पीने ना दिया  

                        …… यूई

  • जिन्दगी जब मेरी खामोशियों में होती है

    जिन्दगी जब मेरी खामोशियों में होती है!
    शाँम-ए-गुजर मेरी मदहोशियों में होती है!
    आजमाइशों में दिन गुजर जाता है मगऱ,
    रात तन्हाँ दर्द की सरगोशियों में होती है!

    #महादेव
    mkraihmvns@gmail.com

  • सूरत जो ज़िन्दगी भर देखी उसमें

    दफनाते हुए मेरी कबर के अन्दर 

    आईना एक उलटा लटका देना

    सूरत जो ज़िन्दगी भर देखी उसमें

    सकू्न वह मौत में भी दिला जाएगी

     

                           …… यूई

  • “ख़ानाबदोश-सी ज़िन्दगी” #2Liner-94

    .

    ღღ__ख़ानाबदोश-सी ज़िन्दगी ही, लिखी है नसीब में “साहब”;
    .
    कुछ लोगों का इस जहाँ में, अपना ठिकाना नहीं होता!!…..‪#‎अक्स

    .

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  • प्यार वोह जो ज़िन्दगी दिखलाई तूने

    प्यार वोह जो ज़िन्दगी दिखलाई तूने,

    प्यार है वो ज़िन्दगी जो जिवाई तूने

                             …… यूई

  • यह ज़िन्दगी तो बस मौत का दूसरा नाम हो गई

    बेइंतेहा दर्दो को सहने की, अश्कों को पीने की

    सांसो की घुटन में रहने की, गमों में जीने की

    आदतें सारी यह किस किस की ग़ुलाम हो गई

    यह ज़िन्दगी तो बस मौत का दूसरा नाम हो गई

                                            …….. यूई       

  • रूह-ए-ज़िन्दगी हम भरते है तबसे

    ज़िन्दगी ने रूह को लुटा है जबसे
    रूह-ए-ज़िन्दगी हम भरते है तबसे

    ……. यूई

  • अंदाज़-ए-ज़िन्दगी दम भरते हैं हमसे

    अंदाज़-ए-ज़िन्दगी दम भरते हैं हमसे
    खौफ-ए-ज़िन्दगी ना मिलते हैं हमसे
    ……. यूई

  • ए ज़िन्दगी – 12

    ए ज़िन्दगी

     

    जीतेंगे हम जीतेंगे इस मुश्किल को भी जीतेंगे

    जीतेंगे हम जीतेंगे हम हारी बाज़ी जीतेंगे

    जीतेंगे हम जीतेंगे भँवर से गुज़र कर जीतेंगे

    जीतेंगे हम जीतेंगे तुझे पार लगा फिर जीतेंगे 

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 11

    ए ज़िन्दगी

     

    इस बाधा को पार करने में

    क्या हमें कठिनाई है

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 10

    ए ज़िन्दगी

     

    सभी बाधाओं को तोड़,

    चाहतें तेरी हमने कमाई हैं

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 9

    ए ज़िन्दगी

     

    यह छोटी सी रुकावटे

    तुम्हें हमसे ना ज़ुदा कर पायेंगी

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 8

    ए ज़िन्दगी

     

    हौसलों की परवाज़ो से

    हर मुश्किल छोटी कर पाई है

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 7

    ए ज़िन्दगी

     

    लाखों अवरोधों से लड़

    हमने तेरी नैया पार लगायी है

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 6

    ए ज़िन्दगी

     

    मुश्किल राहों को सर करने की

                अपनी पुरानी रवाई है

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 5

    ए ज़िन्दगी

     

    कितने व्यवधानों में डाल

    तूने हमारी वफ़ा आज़्मायी है

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 4

    ए ज़िन्दगी

     

    सब भँवरो और तूफानों से,

    तुझे बचाने की इच्छाई है

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 3

    ए ज़िन्दगी

     

    तू इक दिन तो जानेगी,

    हम तेरे कितने शौदायी हैं

                            

                                          …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 2

    ए ज़िन्दगी

     

    आसान ना थी कभी तेरी राहें

    पर हमने वफ़ा निभायी है

                                                                  …… यूई

  • ए ज़िन्दगी – 1

    ए ज़िन्दगी

     

    ए ज़िन्दगी तुझे हर हाल में

    चाहने की कसम हमने खाई है

                             

                                          …… यूई

  • मेरी जिन्दगी तुम्हारी आहट खोज लेती है

    मेरी जिन्दगी तुम्हारी आहट खोज लेती है!
    कोई कली जिसतरह मुस्कुराहट खोज लेती है!
    हरतरफ होती हैं दीवारें सन्नाटों की मगर,
    मयकदों को जाम की सुगबुगाहट खोज लेती है!

    Composed By #महादेव

  • ए ज़िन्दगी ……

    ए ज़िन्दगी ……

    ए ज़िन्दगी 

     

    कैसे शिकायत करूँ तुझसे

    खुदा की बंदगी पाई तुझसे

    बस तुझमें सिमटा रह्ता हूँ

    हर पल तेरे ही संग रहता हूँ

     

    कभी टेडी मेडी लकीरों में

    कभी रंग भर उन्ही लकीरों में

    कभी अल्फाज़ बन तकरीरो में

    कभी जज़्बात बन फकीरों में

     

    बस तुझमें सिमटा रह्ता हूँ

    हर पल तेरे ही संग रहता हूँ

    कभी अकेले में, कभी मेले में

    मैं तुझसे मिलता रहता हूँ

     

     

    तेरा हर रंग आंखों में बसाया मैंने

    उनको आँखों से दिल में उतारा मैंने

    उन रंगो में अपना खून मिलाया मैंने

    ऐसे ख़ुदी को तेरे रंग में रंगाया मैंने

     

    तेरी खूबसूरती में ख़ुद को भिगोया मैंने

    तेरी मस्तियों में कूद ख़ुद को तेराया मैंने

    तेरी गहराईयों में उतर इश्क़ रचाया मैंने

    अ‍पनी रूह को तेरे इश्क़ में नहलाया मैंने

     

    तेरे पलों को ज़ज़्बातो से सँजोया मैंने

    उन ज़ज़्बातो को दिल से पिरोया मैंने

    तेरी आग में तप ख़ुद को बनाया मैंने

    बना ख़ुद को तुझे माथे पे सजाया मैंने

     

    बड़ी शिद्दत से यह इश्क रचाया मैंने

    सूख दुःख में एक सा साथ निभाया मैंने

    जब अपने मन को समुंदर बनाया मैंने

    तब तेरी कहानी को मुकमल बनाया मैंने

     

    यूई तो कभसे तुझमें सिमटा बैठा है

    वो तन मन तेरे रंग में रंगा बैठा है

    अब तुम भी युई में सिमटी रहती हो

    हर पल उसके ही रंग में रँगती हो

     

                                       …… यूई

  • ज़िन्दगी ना थी – 11

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी,

    जैसी तुम्हारी

    इस ज़िन्दगी के बाद भी

    यूई के बुलंद हौंसलों पे

    दुश्मन भी इतराते हैं 

  • ज़िन्दगी ना थी – 10

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी,

    जैसी तुम्हारी

    इस ज़िन्दगी के बाद भी

    सामने मेरे आने से

    अब तूफान भी घभराते हैं

  • ज़िन्दगी ना थी – 9

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी,

    जैसी तुम्हारी

    इस ज़िन्दगी के बाद भी

    लिया है सीख

    रुख पलट बाधाओं के

    हर हाल में जीना हमने

  • ज़िन्दगी ना थी – 8

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी,

    जैसी तुम्हारी

    इस ज़िन्दगी के बाद भी

    लिया है सीख

    अवरोधों को सर करना हमनें 

  • ज़िन्दगी ना थी – 7

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी,

    जैसी तुम्हारी

    आस्मानी अरमानो के ना थे पंख हमारे,

    जैसे तुम्हारे

  • ज़िन्दगी ना थी – 6

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी,

    जैसी तुम्हारी

    आँखों में ना थे सपने रंगीन हमारे,

    जैसे तुम्हारे

  • ज़िन्दगी ना थी – 5

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी

    बाज़ूओं को ना था कोई सहांरा, जैसा तुम्हारा

  • ज़िन्दगी ना थी – 4

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी

    बचपन ना था बचपन हमारा, जैसा तुम्हारा

  • ज़िन्दगी ना थी – 3

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी

    मजबूरियाँ थी अजब सबकी हमारी, ना जैसी तुम्हारी

  • ज़िन्दगी ना थी – 2

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी

    दीवारें थी कच्ची कमजोर हमारी, ना जैसी तुम्हारी

  • ज़िन्दगी ना- 1 थी

    ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी

    पक्की छत ना थी सर पे हमारी, जैसी तुम्हारी

  • ღღ__ज़िन्दगी भी कुछ ऐसे ख्याल में गुजरी

    ღღ__ज़िन्दगी भी कुछ ऐसे ख्याल में गुजरी;

    जैसे शब्-ए-फुरकत किसी मलाल में गुजरी !!

    .

    जिसमें इश्क़, हो जाता है बे-वजह;

    वो उम्र तो बस, अभी हाल में गुजरी !!

    .

    क्यूँकर हसीन सपने, देख लेती है आँखें;

    हकीक़त तो अक्सर, किसी सवाल में गुजरी !!

    .

    तन्हाईयों की उम्र भी कितनी अजीब है;

    रोज़-ओ-शब् बस एक ही हाल में गुजरी !!…… #अक्स

  • ज़िन्दगी की चुनौती

    चुनौती ज़िन्दगी का,

    कहता हैं, हूँ मैं हर मोड पर,

    लेकिन हम भी कुछ कम नहीं,

    इन्हीं चुनौतियों के सात जीना सीख लिया हैं,

    की कभी कबार लगता हैं की इनके बिना ज़िन्दगी अधूरी हैं.

     

    चुनौतियाँ एक नाम देती हैं ज़िन्दगी को,

    एक मुकाम तक पोहोंचने के लिए सहारा बनती हैं वो,

    हमारी इम्तिहान लेती हैं ऐ,

    और हमें पहले से भी एक बेहतर इन्सान हैं बनाती,

    चुनातियाँ देती हैं दो रास्ते,

    चुनाव हमारे हात मे,

    जो हमारा कल बतायेगा,

    हमारी ज़िन्दगी हैं हमारी हातों में,

     

    तो भई सुनलो हमारी बात,

    कभी न भागना चुनौतियों से,

    सफ़र सुहाना होता हैं चुनौतियों के साथ ….

     

  • दर्द- इश्क और ज़िन्दगी

    लड़कपन की बात ही कुछ और थी, तब तो मेरी भी आँखों में सपने सुहाने थे !

    हाथों में हाथ डाल कर, सीखेगी दुनिया हमसे प्यार करना, कुछ ऐसे वादे हमारे थे!

    चलता तो रहा मैं सिर्फ उसको देख कर, उस पर विश्वास कर, अनजानी सी राहो पर,

    पर छोड़ अकेला मुझे वो चला ही गया, बिना कुछ बताये खुद की बनाई हुई नयी राहो पर!!

     

    ना जाने ऐसा क्या था उसी में, जो टूट कर मैं इतना बदल गया,

    शराब के नाम से नफरत करने वाला, आज उसी में सिमटता रहा,

    देरसबेर तक यूँ  ही मैं नशे में अकसर चूर रहने लगा,

    एक दिन ना जाने कब मेरी आँख लगी और मैं सो गया,

    जब देखा ख्वाब तो, वो मेरे सामने खडी थी,

    उसकी आँखों से बह रही आंसुओ की लड़ी थी!!

    बोली, तुम्हे छोड़ कर मैं बहुत पछता रही हूँ,

    पर फ़िक्र मत करो, तुम्हे भी अपने पास बुला रही हूँ!!!

    जब टुटा ख्वाब का ख्वाब, तब मैं सुन्न पड़ा था,

    मेरा पार्थिव जिस्म धरती पर बेसुध सा पड़ा था!!

    आस पास में मेरे, लोगों का मेला सा लगा था,

    उसी बीच में मेरी माँ का तो रो रो बहुत बुरा हाल था,

    किसी कोने में खड़ा छोटा भाई भी मुझे धिक्कार रहा था!!

    बाबा तो मानो बेजान से हो गये थे,,

    बाकी बचे लोग मुझे नहला रहे थे,

    देखते ही देखते चार लोगों ने मुझे अपने कंधो पर रख लिया,

    थोड़ी देर में ही सफ़ेद कपडे में लपेट कर लकड़ी से ढक दिया,

    कुछ लोग मेरी अच्छाइयों के बारे में एक दूसरे को बतला रहे थे,

    इसी बीच घरवाले मेरे शरीर को अग्नि के हवाले करवा रहे थे,

     

    ज्यों ही लगी मेरे तन में आग, फट से मेरी आँख खुल गयी,

    सपना था ये सोच कर, मेरे रोमरोम की हर एक कली खिल गयी,

    तब मुझे ये समझ आई कि, ये जिंदगी तो बस गिरवी हैं,

    इस पर माँबाप, भाईबहन, दोस्त सब का हक हैं,

    यह सिर्फ एक माशूका के इर्दगिर्द नहीं सिमटी हैं,

    ज़िन्दगी की क्या कीमत हैं, एक सपने ने मुझको सिखा दिया,

    दर्द तो अभी भी बहुत होता हैं पर,

     

    दर्द को ज़लील कर फिर से मुसकराना जीना सिखा दिया,

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