Wo din ab dur nahi

वो दिन अब दूर नहीं जब,
होगा चांद हमारी मुट्ठी में,
तो क्या हुआ जब रह गया
फासला थोड़ी दूरी का,
हौसला तो अभी बाकी है,
मंजिल भी पा लेंगे हम,
कल का सपना देख रहे हम.
जब चांद पर होगा अपना यान,
वो दिन अब दूर नहीं जब,
शैर को जाएंगे चांद पर हम,
होगा हमारा भी घर वहां,
दुनिया करेगी हमें सलाम |

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12 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 10, 2019, 5:35 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 10, 2019, 9:24 pm

    वाह बहुत सुंदर

  3. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 10:10 pm

    Bahoot khub h

  4. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 10:13 pm

    Very nice

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