वो दिन अब दूर नहीं जब,
होगा चांद हमारी मुट्ठी में,
तो क्या हुआ जब रह गया
फासला थोड़ी दूरी का,
हौसला तो अभी बाकी है,
मंजिल भी पा लेंगे हम,
कल का सपना देख रहे हम.
जब चांद पर होगा अपना यान,
वो दिन अब दूर नहीं जब,
शैर को जाएंगे चांद पर हम,
होगा हमारा भी घर वहां,
दुनिया करेगी हमें सलाम |
Wo din ab dur nahi
Comments
14 responses to “Wo din ab dur nahi”
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Nice
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Thanks
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वाह बहुत सुंदर रचना
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Thanks
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Good
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Thanks
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वाह बहुत सुंदर
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Thanks
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Bahoot khub h
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Thanks
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Very nice
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Thanks
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Wah
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Superb
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