अपहरण

” अपहरण “हाथों में तख्ती, गाड़ी पर लाउडस्पीकर, हट्टे -कट्टे, मोटे -पतले, नर- नारी, नौजवानों- बूढ़े लोगों  की भीड़, कुछ पैदल और कुछ दो पहिया वाहन से, नारा लगाते  चिल्लाते उसी  कुछ झण्डा  चमकाते दलगत राजनीति से ओत – प्रोत हौशले से  नारा लगाते हुए कि – हर जोर जुल्म की टक्कर , में संघर्ष हमारा नारा है।अभी तो यह अंगड़ाई है ,आगे और लड़ाई है |आप हमारे भाई हैं,समर्थन के लिए बधाई है।उनके बूच से कुछ लोग बोलते हैं कि-विवेक को हमें छुड़ाना है, नया जमाना लाना है।नया जमाना आएगा ,वह धूल में मिल जाएगा | गली – मोहल्ले में शोर है,अपहरणकर्ता चोर हैं।जनता को हमें बचाना है,नई व्यवस्था लाना है।उममें से कुछ लोग कहते रहे सभी लोग सड़क किनारे खड़े हो जाओ ! खड़े -खड़े हो जाओ भाई , हमसे अब तुम मत टकराओ।सुशासन हमको लाना है, भ्रष्टाचार मिटाना है। जनता को जगाना है। विवेक को छुड़ाना है।सड़क के किनारे राहगीर खड़े हो जाते हैं वही  नारा लगाते हुए भीड़ आगे बढ़ती जाती है। नारा लगाने वाले कहते हैं कि-आप हमारा साथ दो हम विवेक को आजादी देंगे।      एक व्यक्ति से हमने पूछा कि विवेक वह कौनहै  जिसके लिए जिसके लोग नारेबाजी और प्रदर्शन हो रहा है। इतना सुनते हीउसी भीड़ से  एक व्यक्ति आगे बढ़ता है और कहता है तुम विवेक को नहीं जानते,  विवेक एक  कवि – लेखक है।मैंने कहा  कि -जब  वह  एक कवि और लेखक है तो यह तय है कि  उसके पास धन नहीं है|  वह ध्यान ही करने वाला  है | यदि वह एक सामान्य नागरिक है तो उसका  अपहरण नहीं होना चाहिए था। उसका विषय –  वस्तु मुफ्त है। वह एक रचनाकार है | वह अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को सुधारने का कार्य करता है और लोगों के दिल को जीतने का काम करता है। अपहरण ! अपहरण को तो धन- दौलत  की लालच मैं किया जाता है जिसे हम सब ने आज तक सूना है | जब उसके पास धन नहीं है ऐसी स्थिति में अपहरणकर्ताओं ने अपहरण किस लिए किया होगा ! हमने उससे प्रश्न किया | उस व्यक्ति ने मुझसे उत्सुकता से बोला – क्या कहा  है, आपको मालूम है कि जितने भी अपहरन होते हैं वह सभी बड़े आदमियों के ही होते हैं ?  नहीं सभी अपहरण बड़े आदमियों के ही नहीं होते। कुछ तो बुद्धिमानो के भी  अपहरण होते हैं।मैंने कहा कि अपहरण करने के पूर्व रुपए का लोभ, कर्ज का स्वार्थ ही तो होता होगा |  यह भी जानकारी मिलती है कि अपहरणकर्ता उसकी जमीन हथिया लेने  के लिए भी अपहरण करते हैं और कुछ अपहरणकर्ता महिलाओं का भी अपहरण करने की हिम्मत करके बलात्कार जैसी घटना को अंजाम दे दिया करते हैं।ऐसे भी अपहरण की कहानी सुनने में आती है कि अपने ही माता- पिता को अपने खुद को कब्जे में लेकर उनका धन धीरे- धीरे  चूसने का कार्य लड़के ,भाई ,बंधू ही शुरू कर दिया करते हैं। इसकी चर्चा प्रायः पेंशन योजना प्राप्त लोगों को लेकर काफी चर्चा में आती  है |  उन्हीं खुद के  लड़के गार्जियन के पुरानियान होने  पर परिवार का भरपूर इस्तेमाल अपने हित साधन के लिए किया करते हैं। उनके ए टी एम को लेकर सारी पेंशन निकाल लेते हैं और मनमानी करने लगते हैं। पेंशन भोगी का  पूरा पैसा खुद निकाल कर  हड़प लिया करते हैं। नारे बाजी करने वाला सामने आया और बोला तुम बड़े भोले लगते  हो ! हमें एक चाय की चुस्की लेने के लिए चाय वाले को आदेश दो हम विवेक जैसे महान तेजस्वी लोगों का अपहरण क्यों किया जाता है, इसमें  कार्यवाही कैसी होती है फल क्या निकलता है हम तुम्हें सब तुम्हें विधिवत बताऊंगा।हमने भी उसकी बात सुनी | बात रोचक लगी उसकी बात पर ध्यान देने के लिए बहुत अच्छी तरह से तैयार हो कर चाय की दुकान पर गया | दूकान पास में ही थी |  दो प्याली चाय के लिए आर्डर दे दिया। एक प्याली चाय हमने ली और दूसरी  प्याली चाय उस व्यक्ति की तरफ बढ़ा दिया ।उसने चाय की चुस्की ली फिर  बोला  कि – जनाब ! कुछ लोग तो अपहरण का नाटक भी करते हैं। अमूमन अपहृत युवती, बच्चे, बड़े,लोग साधारण  आदमियों में से नहीं होते हैं | अपहृत ब्यक्ति  बड़े आदमी ही होते हैं। अपहरण करने के बाद मानव जीवन में ही वह देवता हो जाता है। आप कहेंगे देवताओं की मूर्तियों की पूजा अर्चना की जाती है तो सुनो ! हम कह सकते हैं कि भगवान की भक्ति की ही भांति उस व्यक्ति को भी हर जब तक कब्जे में रखा जाता है उसे भी सुविधाएं उपलब्ध कराने में सफल प्रयास किया जाता है | जबतक अपहरणकर्ताओं की पहुंच उसके मालिक तक नहीं किया गया होता है और उसके एवज में रिश्वत के रूप में मागी गई रकम नहीं मिल पाई होती है।तब तक अपहरण से अपहरण करने अनजान वाले लोगों के खिलाफ आवाज उठती है नारे गढ़ते हैं। नारा प्रदर्शन किया जाता है। सरकार को कार्यवाही कठोर करने के लिए तैयार किया जाता है। पुलिस प्रशासन को प्रारंभ जांच करने का विधान सरकार करती है। प्रदर्शन जोर पकड़ने वाला होता है तब सरकार की नीद खुलती है।अपनी सरकार बचाने , सरकार की इज्जत बचाने की कोशिश होने लगती है। उधर प्रदर्शन करने वाले लोगों को अपने जीवन में चुनाव प्रचार अभियान चलाने की चिंता बनी रहती है। जोरदार नारेबाजी अनशन प्रदर्शन करने वाले लोगों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया स्वरूप जनता सहानुभूति रखने लगती है। प्रदर्शन करने वाला शख्स अपनी जीत चुनाव में देखने सुनने की फिराक में रहते हैं। नेता बनने का सपना देखने लगते हैं। कुछ एक लोग चुनाव में टिकट भी पा जाते हैं और जनता की सहानभूति का फायदा उठाकर चुनाव जीत जाते हैं।अगवा करने का मतलब क्या होता है यह अनोखा तरीका और खेल तो आप अबतक समझ लिए होगे।आगे उसने कहा कि अपहरण करने वाला फिर फिरौती की रकम की बात करता है जिसमें प्राय: औरतों का इस्तेमाल किया जाता है। औरतें मर्दों की अपेक्षा अधिक लोकप्रिय मुख्य भूमिका में कार्य करने में सक्षम होती हैं। वह फेसबुक पेज, ट्यूटर, इंस्ट्राग्राम, लिंकडम आदि साइटों पर सक्रिय रहती हैं।अनेक तरह तरह से लोगों को रिझाने की कोशिश करने में सफल भी हो सकती है। कुछ तो अपने जाल में फंसाकर धन की प्राप्ति की इच्छा जाहिर कर सोशल साइट पर लाइव हो कर भी धन उगाही की घटना को अंजाम देने का वादा कराने में सफल हो जाती हैं। फंसे हुए लोगों से ख्वाइश के हिसाब से नाच गाना आंख मारना आदि तरह तरह से रिझाने में सफल प्रयास करती हैं।फिल्मी स्टाइल में नृत्य गान करते हुए योजना को मंजूरी तक पहुंच सके का प्रयास करते हुए अंजाम तक पहुंचाने की भूमिका निभाती नजर आने लगती हैं। जनाब हैं समझते हैं कि आप समझ गए होंगे।आपने पूछा था कि अपहृत व्यक्ति कैसे देवता हो जाता है?उसने कहा कि अपहरण करने वाले व्यक्ति के जीवन से जुड़ी ख़बरें आप को ज्ञात नहीं है आप तो बड़े भोले हो। भाईजान अगवा किया गया आदमी के लिए शासन प्रशासन लग जाता है। उसकी  खोज  बीन कराने के लिए तैयारी  की जाती है। पुलिस प्रशासन को यह बतला दिया जाता है कि अमुक व्यक्ति की खोज करने के लिए अपहरण करने वाले लोगों की पहचान की जाय उसकी कुण्डली खंगाली जाय ।उस पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। कमेटी बनती है और सुरु हो जाती है खोज !विभिन्न मतावलंबी दल भी उसमें भी वोट की खोज में लगे रहते हैं। वहीं शासन प्रशासन के पास अपनी सरकार और पुलिस की इज्जत बचाने की कोशिश करती है। शासन सत्ता के लोग बड़े आदमियों के लिए तैयार आवश्यक कदम उठाने की लगी रहती है। बाकी के पूर्व सोच के हिसाब से हल्ला चिल्ला  मचाने की तैयारी में जुटे हुए आगे बढ़ने की उम्मीद लिए होड़ में लग जाते हैं।अपहृत व्यक्ति के खिलाफ मोर्चा खोल कर अपहरण करने वाला शख्स रुपया नहीं आया यह जानकर आश्चर्य करते हुए आगे का हिस्सा करने पर उतारू हो जाता है।रुपए को हासिल करने के लिए आज कल नया प्लान बनाया जाता है और किसी औरत को अपने अधीन काम करने की व्यवस्था दी जाती है। वहीं  औरत अपहृत के छोड़ने के लिए रुपए की मांग करती है।रुपया पहुंचा दिया जाय , इतना ,नहीं तो , किसी को खबर नहीं करनी होगी, नहीं तो, न मामले में क्या होगा, जानते हो!, पुलिस को बताया तो , क्या होगा,समझ गए न , हम फिर फोन करेंगे, आदिकभी कभी वीडियो काल करके अपहृत से बात भी कर देते हैं। वायस रिकार्डिंग का भी प्रयोग होता है।वह व्यक्ति आगे बोला अरे भाई जान आप का अपहरण कभी हुआ है अथावाई नहीं?मैंने कहा आप तो दिलचस्प आदमी लगते हो!जबकि उसकी नीयत साफ नहीं लगी उसकी बात बिच्छू की डंक की भांति मुझे चुभी।मैंने कहा कि क्या वाहियात की बातें करने लगे हो,मेरा अपहरण कोई क्यों करेगा। मेरे पास कुछ भी तो नहीं है।इतना सुनकर उसने कहा कि अपहरण किसका होता है किसका होना चाहिए, किस लिए होता है यह हमें  मत समझाइए! आपने पूछा तो मैंने यह सब बता दिया वर्ना  —— ।भाईजान आपने मुझे चाय पिलाई । आप बड़े आदमियों में शामिल हैं। वर्ना आज कल कौन किसको पूछता है । पहले का समय पीछे छूट गया जब लोग अपने घर आने वाले अतिथियों का स्वागत खातिर किया करते थे। खैर मकदम पूछते थे।अपहरण करने वाले व्यक्ति केवल पैसे के लिए ही अपहरण नहीं करते हैं। फिर आप एक कवि हैं सम्मेलनों में जाते ही होंगे। धनवानों के बीच तालमेल ज़रूरी हो सकता है।बुद्धिमान व्यक्ति के साथ मिलकर धनवान नाम कमाने के लिए साथ लगा मीठी वाणी से स्वागत आभार व्यक्त करता है। मुख्य भूमिका में नजर आने लगते हैं।मसलन बुद्धि और विवेक से धन बल बुद्धि के माध्यम से लोगों को जन बल की शक्ति मिलती है। धन शक्ति के आगे बुद्धि शक्ति अधिक लोकप्रिय है। परन्तु बुद्धि शक्ति के आगे धन शक्ति सर झुका देती है। जिस प्रकार नारी शक्ति पुरुष शक्ति को अपने अधीन कर लेती है उसी प्रकार बुद्धि शक्ति के खांसने छीकने पर राह के सभी अवरोधक रोड़े हट जाते हैं। पुलिस भी चौबीसों घण्टे नौकरी करने की आवश्यकता पर सुख नहीं रह पाती कुछ की फिराक साहब उसे भी होती है। नेता जी की नेतागिरी चमकाने का मौका मिल जाता है। रही बात अपहृत के घर वाले वी वी , बच्चे की । वह भी कुछ एक दिन आंसू बहा कर रह ही जाते हैं।भारी हो हल्ला मचाने को रोकने के लिए मदद के रूप में परिवार को सरकार कुछ रूपयों की मदद दे कर पल्ला झाड़ लिया करती है।यह सब कुछ चलते रही की बातें सुनकर मैं तो वहां से निकालना ही सही समझा और वहां से निकल लिया।- सुखमंगल सिंह, अवध निवासी

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