अभी-अभी।

अभी-अभी कुछ बूंदों से रूबरू हुए,
चमकते हैं मोती से,
बरसते हैं बुंदों की तरह।
पर आयानास ही नहीं बरसते।
जब बनते हैं गम के बादल,
सिमट जाते हैं पलकों पर।
फिर गिरते हैं धीरे-धीरे
बिना किसी शोर के क्षण-क्षण।


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12 Comments

  1. Suman Kumari - September 20, 2020, 4:46 pm

    बहुत ही सुन्दर

  2. Pragya Shukla - September 20, 2020, 7:44 pm

    Nice

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 20, 2020, 8:53 pm

    अतिसुंदर

  4. मोहन सिंह मानुष - September 22, 2020, 1:19 pm

    Very nice

  5. Pushpendra Kumar - September 30, 2020, 10:26 pm

    शानदार

  6. Anonymous - September 30, 2020, 11:48 pm

    Sundar!

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