हे शिव!
स्त्रियों की मन स्थिति
जानने को पार्वती संग. …
अर्धनारीश्वर रूप रखा होगा।
इस रूप में आने के बाद
आपने खुद ही एहसास किया होगा।
जीवन गाड़ी के दो पहियों के समान है,
जीवनसंगिनी को साथ में लेकर चलना
सफल जीवन की पहचान है।
जीवनसंगिनी के साथ पग पग पर,
आपने भी तो विष पिया होगा।
विष कंठ से नीचे नहीं उतार पाए ना,
कंठ नीला पड़ गया
और पार्वती उनका क्या?
बोले गए हर कटु शब्द के विष को
हंसते-हंसते पीती गई
कंठ से उतारा भी,
उसे नीला ना पड़ने दिया।
विषपान करके भी मुस्कुराती नहीं।
किस मिट्टी से बनाया है स्त्री को प्रभु?
सोचकर हैरान हूं।
निमिषा सिंघल
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