अज़ल से हमारे हो

आज से नहीं तुम
अज़ल से हमारे हो,
गैहान जब से
बना होगा तब से,
दिल मे हमारे हो
गजल में हमारे हो।

अज़ल – अनादिकाल
गैहान – सृष्टि


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14 Comments

  1. Devi Kamla - September 14, 2020, 11:31 pm

    बहुत खूब

  2. Suman Kumari - September 14, 2020, 11:40 pm

    बहुत सुन्दर

  3. Geeta kumari - September 15, 2020, 6:53 am

    वाह, सतीश सर बहुत ख़ूब।
    आपकी रचनाओं का तो कोई जवाब ही नहीं है, सब की सब लाजवाब ।

    • Satish Pandey - September 15, 2020, 6:11 pm

      सादर धन्यवाद गीता जी, आपके द्वारा निरंतर किया गया उत्साहवर्धन सचमुच प्रशंसनीय है। सादर अभिवादन

  4. Chandra Pandey - September 15, 2020, 7:47 am

    Wow great, nice

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 15, 2020, 9:47 am

    बहुत खूब

  6. Pragya Shukla - September 15, 2020, 3:40 pm

    Good

  7. Pratima chaudhary - September 16, 2020, 9:24 pm

    बहुत सुंदर

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