अज़ल से हमारे हो

आज से नहीं तुम
अज़ल से हमारे हो,
गैहान जब से
बना होगा तब से,
दिल मे हमारे हो
गजल में हमारे हो।

अज़ल – अनादिकाल
गैहान – सृष्टि

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Responses

  1. वाह, सतीश सर बहुत ख़ूब।
    आपकी रचनाओं का तो कोई जवाब ही नहीं है, सब की सब लाजवाब ।

    1. सादर धन्यवाद गीता जी, आपके द्वारा निरंतर किया गया उत्साहवर्धन सचमुच प्रशंसनीय है। सादर अभिवादन

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