करुँ कितना भी श्रिंगार पर जानती हूँ
तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ मैं
दीद जिस दिन नहीं होती तेरी
चांद छत पर नहीं आता
आईना जितनी दफ़ा देखूँ
तेरा ही चेहरा नज़र आता
आईना जितनी दफ़ा देखूँ
Comments
10 responses to “आईना जितनी दफ़ा देखूँ”
-

Nice
-

थैंक्स
-
-

Good
-

Thanks
-
-
Nice
-

धन्यवाद
-
-

Nyc
-

धन्यवाद 🙏🙏
-
-

वाह
-

बहुत खूब
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.