आखिर क्या समझूं ???

तुम्हारी बेरुखी को
प्यार समझूं या खता समझूं
तू ही बता ना
आखिर क्या समझूं ?

सामने आकर भी मुह फेर लेते हो
बेबसी समझूं या बेवफाई समझूं
तू ही बता ना
आखिर क्या समझूं ?

रुला देते हो तुम मुझे बार-बार
किस्मत समझूं या पनौती समझूं
तू ही बता ना
आखिर क्या समझूं ?


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6 Comments

  1. Geeta kumari - November 17, 2020, 11:48 am

    एक प्रेमिका के हृदय की तड़प को बयां करती हुई कवि प्रज्ञा जी की बेहद संजीदा रचना

  2. Suman Kumari - November 17, 2020, 3:54 pm

    बेहतरीन

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 18, 2020, 7:58 am

    अतिसुंदर

  4. vivek singhal - November 19, 2020, 10:58 am

    लाजवाब जिसका कोई जवाब नहीं

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