आखिर क्या समझूं ???

तुम्हारी बेरुखी को
प्यार समझूं या खता समझूं
तू ही बता ना
आखिर क्या समझूं ?

सामने आकर भी मुह फेर लेते हो
बेबसी समझूं या बेवफाई समझूं
तू ही बता ना
आखिर क्या समझूं ?

रुला देते हो तुम मुझे बार-बार
किस्मत समझूं या पनौती समझूं
तू ही बता ना
आखिर क्या समझूं ?

Comments

6 responses to “आखिर क्या समझूं ???”

  1. Geeta kumari

    एक प्रेमिका के हृदय की तड़प को बयां करती हुई कवि प्रज्ञा जी की बेहद संजीदा रचना

  2. This comment is currently unavailable

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