आ जाओ कहाँ हो तुम

आ जाओ कहाँ हो तुम,

कहाँ हो तुम,कहाँ हो तुम .

तुम्हारी गफलत के अफ़साने,

करते फिरते है दीवानें,

ए परवानों तुम्हे क्या खबर है-

बुझ रही है शमां – कहाँ हो  तुम .

तूफानों ने ले ली है रफ़्तार,

मांझी ने छोड़ दि है पतवार,

डगमगा गई है नैया- कहाँ हो तुम .

ताल यहाँ है पर सुर कहाँ है,

मय यहाँ है पर साकी कहाँ है,

साँसें दे गई है जवाब- कहाँ हो तुम .

आ जाओ कहाँ हो तुम .

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2 Comments

  1. Kavi Manohar - September 3, 2016, 8:37 pm

    nice

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