आ रहा मंक्रर संक्राति का त्योहार

आ रहा मंक्रर संक्राति का त्योहार।

तिल को गुड़ से मिलायेगें,
दही को छक कर खायेगें।
नही होगा किसी से शिकवा-शिकायत,
दिल को पतंग सा आसमान में उड़ायेगें।

सूर्य नरायण का दर्शन रोज होगा,
भक्त मंडली का किर्तन रोज होगा।
जल से न रहेगा किसी को प्रतिकर्षण,
प्रात: स्नान अर्पण रोज होगा।

मनायेगा इसे पूरा देश अलग-अलग नाम से,
कोई कहेंगा संक्राति कोई पोंगल बतायेगा।
कोई खिचरी तो कोई माघी बताकर,
खुशी का गीत अपनों संग गुनगुनायेगा।

लम्बें खरमाश के बाद यह आयेगा,
जीवन को नया सिख देकर जायेगा।
हो दु:ख कितना भी गहरा,
कोहरे की भांती खत्म हो जायेगा।

आओ इस संक्रान्ति नया संकल्प अपनाये,
सम्प्रदायिकता की बीज खत्म हो जाये।
बन जाये देश फिर सोने की चिड़िया,
विश्वगुरु बनने के पथ पर अग्रसर हो जायें।

मैं प्रमाणित करता हूँ कि यह मेरी मौलिक रचना हैं।


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8 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 9, 2020, 6:49 pm

    सुंदर

  2. PRAGYA SHUKLA - January 9, 2020, 7:31 pm

    अति सुंदर

  3. Abhishek kumar - January 10, 2020, 12:35 am

    Nice

  4. देवेश साखरे 'देव' - January 10, 2020, 7:39 pm

    सुन्दर

  5. NIMISHA SINGHAL - January 13, 2020, 2:51 am

    Wah

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