आ रहा मंक्रर संक्राति का त्योहार

आ रहा मंक्रर संक्राति का त्योहार।

तिल को गुड़ से मिलायेगें,
दही को छक कर खायेगें।
नही होगा किसी से शिकवा-शिकायत,
दिल को पतंग सा आसमान में उड़ायेगें।

सूर्य नरायण का दर्शन रोज होगा,
भक्त मंडली का किर्तन रोज होगा।
जल से न रहेगा किसी को प्रतिकर्षण,
प्रात: स्नान अर्पण रोज होगा।

मनायेगा इसे पूरा देश अलग-अलग नाम से,
कोई कहेंगा संक्राति कोई पोंगल बतायेगा।
कोई खिचरी तो कोई माघी बताकर,
खुशी का गीत अपनों संग गुनगुनायेगा।

लम्बें खरमाश के बाद यह आयेगा,
जीवन को नया सिख देकर जायेगा।
हो दु:ख कितना भी गहरा,
कोहरे की भांती खत्म हो जायेगा।

आओ इस संक्रान्ति नया संकल्प अपनाये,
सम्प्रदायिकता की बीज खत्म हो जाये।
बन जाये देश फिर सोने की चिड़िया,
विश्वगुरु बनने के पथ पर अग्रसर हो जायें।

मैं प्रमाणित करता हूँ कि यह मेरी मौलिक रचना हैं।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

मकर संक्रांति

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close