इश्क आँच पर पकता रहा…

यूँ ही सिलसिला चलता रहा
कभी मैं कभी वो रूठता रहा
टूटने लगे दिल बेतहाशा
मगर इश्क आँच पर पकता रहा..


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

14 Comments

  1. Geeta kumari - September 15, 2020, 4:19 pm

    वाह, बहुत ख़ूब

  2. Satish Pandey - September 15, 2020, 4:21 pm

    वाह वाह, श्रृंगारिक रचना, जद्दोजदह के बावजूद प्रेम के जिंदा रहने की रचना, बहुत ही लाजवाब।

  3. मोहन सिंह मानुष - September 15, 2020, 4:31 pm

    वाह! वाह!

  4. Chandra Pandey - September 15, 2020, 4:44 pm

    Nice

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 15, 2020, 4:58 pm

    सुंदर

  6. vivek singhal - September 15, 2020, 10:36 pm

    बहुत ही सुंदर आउट अॉफ द वर्ड

  7. Pratima chaudhary - September 16, 2020, 9:19 pm

    बहुत उम्दा

Leave a Reply