एक सावन ऐसा भी (कहानी)

              

किसी ने कहा है कि प्रेम की कोई जात नहीं होती, कोई मजहब नहीं होता ।मगर हर किसी की समझ में कहां आती है ये बातें।

कुछ लोगों के लिए समाज में इज्जत से बड़ी कुछ चीज नहीं होती है ,मगर यह इज्जत क्या इंसानियत से भी बढ़कर होती है; यह समझना या समझाना बड़ा मुश्किल है।
बात हरियाणा के एक छोटे से गांव महबूबगड़ की है ।
गांव के खुले आसमान और  हरियाली भरे वातावरण की छटा ही निराली होती है जो आपको कहीं नहीं मिलता वह गांव में मिलता है जैसे कि एक- दूसरे के साथ भाईचारा, संयुक्त परिवार में रहना, मिलजुल कर काम करना, खाने पीने की चीजें अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी पैदा करना।

ये सब आजकल शहरों में कहां होता है,सब अपने से मतलब रखते हैं; किसी को किसी से कोई लेना देना नहीं होता । मगर गांव में भी बहुत कुछ गलत होता है जोकि आपको कहानी में आगे पता चलेगा।

मन में अपने गांव के बारे में सोच- सोच कर, मोहित दिल्ली में अपने फ्लैट की बिल्डिंग से खाली पड़े; मैदान की तरफ घूरे जा रहा था।
अंदर से कल्पना आवाज देती है -“ऐ जी! सुनते हो खाना तैयार हो गया है आ जाओ।”

कल्पना की आवाज सुनकर मोहित एकदम से गांव की दुनिया से बाहर निकलता है और टेबल की तरफ आगे बढ़ते हुए ( मुस्कुराते हुए)- “बहुत-बहुत मेहरबानी। मैडम जी!हम पधार रहे हैं।”

मोहित और कल्पना की शादी को अभी छह महीने भी नहीं हुए हैं ,नई नई शादी और ऊपर से साल का पहला सावन आने वाला है ऊपर से तीज का त्यौहार भी ।
हरियाणा में वसंत और तीज से महिलाओं को कुछ
ज्यादा ही प्यार होता है और क्यों नहीं हो, बागों में झूला झूलना, मधुर मधुर गीत गाना, फिर तीज के दिन घरों में अच्छे-अच्छे पकवान बनाना। बहुत सारी बातें हैं प्यार करने की।

मोहित ने पिछले कुछेक महीनों में बहुत सारी तरक्की कर ली है, अपना खुद का फ्लैट, गाड़ी और सभी ऐसो आराम की चीजें।
वह दोनों बहुत ही खुश हैं इस रिश्ते से ।
मगर हैरानी वाली बात यह है की इन दोनों की शादी से न तो मोहित के घर वाले खुश है और ना ही कल्पना के।
मोहित एक दलित परिवार से संबंध रखता है दूसरा कल्पना ब्राह्मण है ।

गांव की विचारधारा के अनुसार एक ब्राह्मण कभी भी एक दलित के साथ अपनी बेटी का विवाह नहीं कर सकता है, दूसरे मोहित के घरवाले मन ही मन तो कल्पना को पसंद करते थे मगर गांव वालों के डर से उन्हें भी यह सब मंजूर नहीं था ।

मोहित और कल्पना ने कोशिश की थी घरवालों को मनाने की मगर उनकी कोशिश असफल रही।
इसमें कोई दो राय नहीं कि मोहित एक अच्छा लड़का था, अच्छी पढ़ाई लिखाई ,अच्छा व्यवहार, कमी बस यही थी कि वह दलित था।

कल्पना मोहित को स्कूल टाइम से जानती थी फिर कॉलेज साथ -साथ पढ़ाई की, ऐसे करते -करते एक दूसरे को अच्छे से जानने लगे, पहचानने लगे ;फिर बात शादी तक चली गई।

मोहित कभी नहीं चाहता था कि वह भाग कर शादी करें, मगर कल्पना की जीद, प्रेम और हालात से मजबूर होकर उसको यह कदम उठाना पड़ा। यही कारण था कि पिछले छह महीनों से गांव में किसी को नहीं पता था कि वह दोनों कहां रह रहे हैं ।

मोहित के पापा ने उसे बेदखल कर दिया था और कल्पना के घर वालों से माफी मांग ली थी मगर कहीं ना कहीं आग की ज्वाला लपटे खा रही थी। मगर यह दोनों दंपत्ति इन बातों से बेपरवाह थे।

कल्पना खाना परोस ते हुए- “सूनो जी बहुत दिन से आप ऑफिस से घर, घर से ऑफिस! बस यही कर रहे हो; मैं चाहती हूं कि कुछ छुट्टियां लो और कहीं ना कहीं घूमने चला जाए ।”

“अपनी शादी के पहले सावन का आनंद लिया जाए।”
मोहित -“नहीं कल्पना तुम जानती हो ना अभी कुछ भी सही नहीं हुआ है। अभी थोड़ा वक्त और लगेगा तुम्हारे घरवालों का गुस्सा ठंडा होने में।”
कल्पना-” ऐसा कुछ नहीं है, सॉरी मैं आपको कुछ बताना भूल गई ।”
मोहित -“क्या?”
कल्पना-“मेरी बात दीदी से हुई थी ,उन्होंने मुझे फेसबुक पर टैक्स किया था।”

मोहित-“तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था ,कल्पना क्या प्रूफ है कि वह तुम्हारी दीदी ही है। ”
कल्पना-” प्रूफ है ना मैंने उसको फ्रॉड सिम से व्हाट्सएप कॉलिंग की थी और दीदी ने मुझे बताया कि भैया को छोड़कर सब लोग चाहते हैं कि मैं उन लोगों से मिलु ।”

मोहित -“यह सब उन लोगों की चाल भी हो सकती है ,गांव के लोगों को मैं बहुत अच्छी तरीके से जानता हूं, आजकल भ्रूण हत्या, ऑनर किलिंग जो हो रही है, सबसे ज्यादा हरियाणा में ही होती है और मैं नहीं चाहता कि तुम्हें हादसों का सामना करना पड़े।”

कल्पना-“मैं समझती हूं, पर मुझे नहीं लगता कि अब ऐसा कुछ होगा ।”
“मोहित! मम्मी तो तभी छटपटा रही होंगी, मुझसे मिलने के लिए और पापा का गुस्सा जल्दी ही शांत हो जाता है और भैया को दीदी मना ही लेंगी । ”

“और दूसरा हमने गलत किया भी क्या है एक ना एक दिन तो शादी करनी ही थी उन्हे मेरी। और तुम भी तो जाना चाहते हो गांव में।”
मोहित-“कल्पना! चाहता तो  मैं भी हूं मगर!”
कल्पना -“क्या मगर!”

मोहित-“मगर मैं अपने दोस्त रोहित से बात करूंगा पहले अगर मुझे लगेगा सब ठीक है तो फिर चलते हैं; तुम्हारा सावन में बाहर घूमने जाना भी हो जाएगा। ”
मोहित खाना खाकर ऑफिस की तरफ रवाना होता है; रास्ते में वह रोहित के पास फोन करता है ।
रोहित से बात होने के बाद वह कल्पना को तैयारियां करने के लिए बोल देता है ।

कल्पना घर जाने की खुशी में कल्पनाओं से भर जाती हैं
मगर उसके मन में उलझन सी हुई उसने वहां जाने से पहले एक बार अपनी मां से बात करना सही लगा,
दीदी के पास बात करके वह अपनी मम्मी से बात करती है-“मम्मी !मुझे माफ कर दो, सच में हालात ऐसे हो गए थे,मम्मी मैं नहीं रह सकती थी, मोहित के बगैर और पापा मेरी दूसरी जगह शादी करना चाहते थे।”

कल्पना की मां-“मैं समझती हूं बेटा मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है ,तुमने मुझे बताया भी तो था।”
“और मुझे तो मोहित पहले से ही पसंद था जो होता है अच्छे के लिए होता है बेटी। ”
कल्पना (खुश होते हुए)-क्या मां सच में ! तुम खुश हो इस रिश्ते से।”

कल्पना की मां-“हां ! बेटी मेरा कलेजा फटा जाता है बस एक बार तुम्हें देखना चाहती हूं ।”
“आ जाओ बेटा तुम्हारे पापा बताते तो नहीं है, मगर सब समझती हूं मैं वह भी तड़पते रहते हैं तुम्हारे लिए।”
तो ठीक है, मां हम अगले सप्ताह आ रहे हैं ,आपसे मिलने आप अपना ध्यान रखिए।
यह कहकर कल्पना फोन काट देती है और उसके मन में एक उमंग सी है अपने घरवालों से मिलने की और गांव में जाने की।

गांव में हरे भरे खेत आम के पेड़ों पर, पके हुए आम
जामुन ,अमरूद के बाग; बहुत कुछ देखने लायक है महबूब गढ़ गांव में।
धीमे धीमे गाड़ी की रफ्तार से मोहित और कल्पना प्रकृति का नजारा ले रहे थे और उन दोनों में एक उत्साह के साथ साथ एक घबराहट भी थी क्योंकि काफी समय बाद वह गांव में जा रहे थे ,फिर भी वह यह बात मन में ही दबाए हुए थे।
एकदम से बारिश शुरू हो जाती है कल्पना को पता नहीं क्या होता है, जोर से चिल्लाती है मोहित गाड़ी रोको! रोको ,मोहित ने एकदम से गाड़ी को ब्रेक लगाया कल्पना हंसते हुए ,जल्दी से खिड़की खोल कर बाहर बारिश में भीगने चली जाती है ।
उधर मोहित उसे पकड़ कर लाने के लिए बाहर निकलता है -“अरे !तबीयत खराब हो जाएगी, मत भिगो!”
मगर कल्पना को बहुत मजा आ रहा था बहुत दिनों में उसे ऐसे मौसम का नजारा देखने को मिल रहा था और उन दोनों  की यह  सावन की पहली बारिश थी, फिर मोहित भी उसके साथ भीगने लग जाता है किसी फिल्मी सिन की तरह वे एक दूसरे में खो जाते हैं, बारिश का मजा लेने के बाद वे दोनों घर की तरफ निकलते हैं।

कल्पना -“कितना अच्छा मजा आया, मोहित! हमारी शादी के बाद गांव में हमारा पहली बार आना कितना  मजेदार है ,है ना!
मोहित (मजाक के मूड में) ” हां, शायद।”
अचानक ,सामने खड़ी गाड़ी को देखकर मोहित एकदम से ब्रेक लगाता है गाड़ी में से उतर कर छह सात लोग आकर उनकी गाड़ी पर टूट पड़ते हैं ।
अंदर से मोहित और कल्पना चिल्लाते हैं! कौन हो तुम लोग ? पूरी गाड़ी को लठ और डंडों से  डैमेज कर दिया जाता है
मोहित जल्दी से गाड़ी को पीछे की तरफ चलाता है मगर पीछे भी दो गाड़ियां आकर खड़ी हो जाती हैं मोहित थोड़ा गौर करके देखता है तो पीछे कल्पना के पापा खड़े हैं और ठीक सामने उसके खुद के पापा।
“रतिराम जी !बोलो क्या करना है अंदर की अंदर ही जला दे दोनों को या बाहर निकाल कर मारना है बहुत बड़ी भूल थी हमारी कि इस हरामी को हमने जन्म दिया” मोहित के पापा बड़े जोश के साथ कल्पना के पापा को कहते हैं।
“पूरी इज्जत के झंडे गाड़ दिए हैं दोनों ने ऐसे तो नहीं जाने देंगे ,कितने दिन से कुत्तों की तरह ढूंढ रहे थे इन लोगों को । शुक्र है इस बदचलन की मां ने मुझे बता दिया, वह तो आंखें फाड़ फाड़ कर इंतजार कर रही है इसका” रामप्रसाद तुम्हारा काम हो गया है आज से हमारा गिला शिकवा खत्म तुम अपने घर जा सकते हो। और उस रोहित को इनाम के तौर पर दे देना दो लाख रुपए साला कुत्ते का दोस्त कुत्ता होता है”
उन लोगों  की बात सुनकर मोहित और कल्पना सहमे से रह गए औरआगे होने वाले घटना से मोहित सूचित हो चुका था
मोहित कल्पना को अपने गले से लगाते हुए कहता है- “हमने एक दूसरे के साथ जितना थोड़ा सा वक्त गुजारा है वो हजारों सालों से भी बहुत अच्छा था और हमारी शादी का यह पहला और आखरी सावन बहुत ही यादगार है और सुंदर है ।”
कल्पना ने रोते हुए मोहित को कस कर पकड़ लिया और कहने लगी यह सब मेरी वजह से हुआ है ।
मोहित ने उसे समझाते हुए कहा- “जो होता है अच्छे के लिए होता है। ”
इतनी बातें हुई थी कि वह जानवरों से भी गए गुजरे लोग कुहाड़ियों ,तलवारों से उस गाड़ी पर टूट पड़े और देखते ही देखते पूरी सड़क लहूलुहान हो गई।
और जीत हुई उस समाज के उन इज्जतदार, मान मर्यादा वाले ,हैवानों की ,जिन्होंने दो प्यार करने वाले प्रेमियों को जाति, परंपरा और खोखली मर्यादा  के नाम पर खा लिया।

                              ——-मोहन सिंह मानुष
  कहानी में लिए गए सभी पात्र व गांव का नाम सभी काल्पनिक है इनका किसी भी घटना से कोई संबंध नहीं है।

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Responses

  1. अति सुन्दर,
    ये सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि सच्चाई भी है।

  2. “दोनों दंपत्ति ” सर इस शब्द को लेकर मुझे थोड़ा संशय है, क्या दंपत्ति के साथ दोनों लगाना उचित है, मार्गदर्शन अवश्य करें।

    1. अनुज जी आप बिल्कुल सही हो “दोनों ” नहीं आएगा
      बहुत बहुत आभार आपका ऐसे ही मार्गदर्शन करते रहें
      जब भी त्रुटि नजर आए बेझिझक बता दें।

      1. वास्तव में आपकी लेखनी बहुत सुंदर रूप में चल रही है, जय हो

  3. सतीश जी ये आप सभी का ही प्रेम है जो हौसला बढ़ता है लिखने का।
    बाकी आपका बड़प्पन ही है जो इतना सम्मान मिला है आपसे।

  4. हां ,ऑनर किलिंग के किस्से सुने हैं मैने।कहानी का दुखद अंत हृदय को अंदर तक झकझोर गया। वैसे आपकी लिखी कहानी में अंत तक बांधे रखने की क्षमता है और यही मजबूत लेखनी की पहचान है।

    1. हार्दिक धन्यवाद! मैडम जी
      बस आस-पास जो हो रहा है उसको देखता हूं और अपने विचारों के साथ अभिव्यक्त करने की कोशिश करता हूं।

  5. हमारे आस-पास की घटित घटनाओं को बयां करती बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति।

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