कमी है कुछ तुम में

तुम्हें देख यूँ लगा कुछ भी नहीं माहताब।
सोचता हूँ तुम हकीकत हो या फिर ख्वाब ।

किया इजहारे-मोहब्बत, कल पे टाल दिया,
सारी रात आँखों में कटी, पाने को जवाब ।

कहते हैं तुमसे दोस्ती है, मोहब्बत तो नहीं,
मुझे पाने के कैसे सजा डाले तुमने ख्वाब ।

कर दिया इनकार ‘देव’ कमी है कुछ तुम में,
सोचा भी कैसे इकरारे-मोहब्बत तुमने जनाब ।

देवेश साखरे ‘देव’

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10 Comments

  1. Astrology class - November 5, 2019, 3:14 pm

    बहुत खूव

  2. NIMISHA SINGHAL - November 5, 2019, 10:31 pm

    Nice

  3. Poonam singh - November 6, 2019, 3:42 pm

    Wah

  4. nitu kandera - November 8, 2019, 9:17 am

    Wah

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