कलम कहे

कलम कहती है,बोल दूं,
क्या राज़ दिलों के खोल दूं।
“गीता” चाहे वो मौन रहे,
नज़र लग जाती है, कौन कहे।


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20 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 5, 2020, 8:52 pm

    अतिसुंदर भाव

  2. Geeta kumari - September 5, 2020, 8:59 pm

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏🙏

  3. Indu Pandey - September 5, 2020, 9:20 pm

    बहुत सुन्दर, लाजबाब

    • Geeta kumari - September 5, 2020, 9:28 pm

      बहुत बहुत शुक्रिया इंदु जी 🙏

  4. Devi Kamla - September 5, 2020, 9:22 pm

    जबरदस्त लेखन

  5. Isha Pandey - September 5, 2020, 9:25 pm

    Very very nice

  6. Satish Pandey - September 5, 2020, 9:34 pm

    कलम कहती है,बोल दूं,
    लेखनी पर जबरदस्त पकड़ है, श्रृंगार की परिपूर्णता है। लेखनी की विलक्षण क्षमता काबिलेतारीफ है।

    • Geeta kumari - September 5, 2020, 9:41 pm

      इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु हार्दिक आभार एवम् धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏🙏 बहुत प्रेरक समीक्षा हैं।

  7. प्रतिमा चौधरी - September 5, 2020, 9:55 pm

    Nice lines

  8. Suman Kumari - September 5, 2020, 11:37 pm

    सुन्दर

  9. Piyush Joshi - September 23, 2020, 4:11 pm

    बहुत सुंदर

    • Geeta kumari - September 23, 2020, 4:55 pm

      बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष की 🙏

  10. Chandra Pandey - September 23, 2020, 5:31 pm

    Good very good

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