कलम कहे

कलम कहती है,बोल दूं,
क्या राज़ दिलों के खोल दूं।
“गीता” चाहे वो मौन रहे,
नज़र लग जाती है, कौन कहे।

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नज़र ..

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Responses

  1. कलम कहती है,बोल दूं,
    लेखनी पर जबरदस्त पकड़ है, श्रृंगार की परिपूर्णता है। लेखनी की विलक्षण क्षमता काबिलेतारीफ है।

    1. इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु हार्दिक आभार एवम् धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏🙏 बहुत प्रेरक समीक्षा हैं।

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