कलम कहती है,बोल दूं,
क्या राज़ दिलों के खोल दूं।
“गीता” चाहे वो मौन रहे,
नज़र लग जाती है, कौन कहे।
कलम कहे
Comments
20 responses to “कलम कहे”
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अतिसुंदर भाव
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏🙏
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बहुत सुन्दर, लाजबाब
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बहुत बहुत शुक्रिया इंदु जी 🙏
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जबरदस्त लेखन
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बहुत धन्यवाद और आभार जी🙏
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Very very nice
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💐 Thank you very very much Isha ji 💐
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कलम कहती है,बोल दूं,
लेखनी पर जबरदस्त पकड़ है, श्रृंगार की परिपूर्णता है। लेखनी की विलक्षण क्षमता काबिलेतारीफ है।-
इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु हार्दिक आभार एवम् धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏🙏 बहुत प्रेरक समीक्षा हैं।
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Nice lines
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Thank you very much 🙏
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Nice
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Thank you very much 🙏
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सुन्दर
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धन्यवाद जी
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बहुत सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष की 🙏
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Good very good
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Thanks for your pricious complement 🙏
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