“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994”
किसी भी यात्रा का उद्देश्य सिर्फ मौजमस्ती व् पिकनिक मनाना ही नहीं होता | यात्राएं इसलिए
की जाती हैं कि हम एक-दुसरे की सभ्यता ,संस्कृति,रहन सहन व् विचारों को जान सकें ,करीब
से देख अच्छाई ग्रहण सकें तथा अपनी संस्कृति सभ्यता से प्रभावित कर सकें | अखिल –
भारतीय सद्भावना संगठन द्वारा आयोजित गाठ छ: अगस्त से बाइस अगस्त तक ‘काशी से
कश्मीर तक की सद्भावना यात्रा अपने आप में एक मिसाल बन गयी | सुखमंगल सिंह के साथ
युवा कवि कुमार हेमंत का सहयोग पाकर यात्रा ने एक संस्कृति पहचान कायम की | इस यात्रा
में कुमार हेमंत उत्साहित करते रहे परिणामस्वरूप
निर्विघ्न यात्रा पूरी हुई किन्तु गरीबी ,बेरोजगारी ,व् भ्र्ष्टाचार के चलते समाज की दशा दिनों
दिन खराब होती जा रही | ऐसे में लोग प्रेम मोहब्बत ,भाईचारे ,विश्व बंधुत्व को फालतू चीज
मानने लगे हैं किन्तु अन्दर ही अन्दर आज के विषम परिस्थिति में भी जनमानस में प्रेम व्
भाईचारे के प्रति आस्था व् विश्वास है ,जिसके चलते समाज की गाडी आगे बढ़ती रही | बनारस
से आगे बढ़ने पर देखने से ऐसा लगता है कि हमारा प्रदेश अभी भी काफी पिछड़ा प्रदेश है जहां
विकास होना चाहिए, वहां नहीं हुआ है | जान नेता अपने कर्तब्यों से विमुख होकर सिर्फ राज-
धानियों के होकर रह गये हैं | जौनपुर जैसा ऐतिहासिक शहर आज तक उपेक्षित पड़ा है और
तो और !
देश की राजधानी दिल्ली के बाहरी इलाके भी , प्रदेश की राजधानी लखनऊ मेन बड़े-बड़े नाले
खुले हुये हैं|गंदगी से सारा शहर पटा पड़ा है | सिर्फ सरकारी बंगलों व राजनेताओं के आवासों
पर ही सारी सुविधाएं भरी पड़ी है | एसे मेन कैसे विकास कारी हो ,यही अहम प्रश्न है |पंजाब
मे आज भी लोगों के मन मे भय व आतंक व्याप्त है | हर एक आदमी एक दूसरे को शक की
निगाह से देख रहा है | पंजाब के आगे जम्मू मेन भ्र्श्ताचार का हर तरफ बोलबाला है | किसी
पर किसी का अंकुश नहीं रह गया है | यहाँ कोई किसी का विश्वास भी नहीं करने वाला | जम्मू
में दहशत का माहौल व्याप्त था एक अंजाना डर लोगों के मन में समाया हुआ था | हिमांचल
प्रदेश में हालाकी शांति थी ,मगर वहाँ के लोगों के चेहरे पर असंतुष्टि व व्याकुलता नजर आयी ,
लगता था वह वर्तमान व्यवस्था से क्षुब्ध थे | कश्मीर में डोडा जिले व आस-पास के इलाकोण में
भयावह सन्नाटा छाया हिया था |कभी -कभी अज्ञात स्थानों से गोलियों के चलने की आवाज साफ
सुनाई दे रही थी | सेना के जावाज़ जवानों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुये श्री नगर नहीं
जाने दिया ,मगर फिर भी हम लोग कुछ दूर जाने में सफल रहे | जम्मू में ए0 डी0 सी 0 डिप्टी
कमिश्नर ने पहले ही श्रीनगर न जाने के लिए आगाह किया था | यद्यपि हमारे ऊपर श्रीनगर
जाने की धुन सवार थी | इसी बात को लेकर कुमार हेमंत से कहासुनी भी हो गई फी क्या था
स्थिति हो भाँपते हुये माँ वैष्णवो देवी चल दिया | म्झे इस यात्रा से ऐसा लगा कि देश का युवा
वर्ग ज्यादा सद्भावना जागृत कर सकता है | बसरते उसके सामने बेरोजगारी ,रोटी कि समेस्या
न हो ! रास्ते में जीतने भी युवक मिले सभी ने भाई-चारे व प्रेम जागृत करने पर बल दिया |
लखनऊ में -लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र सद्भावना के प्रति काफी उत्साहित थे | उन लोगो
ने हम लोगों का काफी उत्साह व मन के साथ स्वागत किया | दिल्ली के रोहणी व पाल्म में
नागरिकों नें भावना और मन से स्वागत किया | रोहणी में मैंने 15 अगस्त पर झण्डा फहराते हुये
कहा कि अगर देश में फिर से भाई चारा कायम हो जाय तो यह देश स्वर्ग बन सकता है ,वशर्ते इस
देश को स्वावलंबी बनाया जाय न कि विदेशी कंपनियों की गुलामी स्वीकार की जाय |महाप्रबंधक
दूर संचार ,वाराणसी रवीन्द्र नाथ प्रभावर ,जिलाधिकारी वाराणसी नेत्राम, लखनऊ में अखण्ड प्रताप
सिंह मुखी गृह सचिव, उत्तर प्रदेश ,लखनऊ सचिवालय के अनुभाग अधिकारी एस 0 पी 0 त्रिपाठी ,
लखनऊ जिलाधिकारी श्री खरे जी ,दिल्लीमें गुरुद्वारा कमेटी के लोग ,अंबाला में दूरसंचार विभाग के
महाप्रबंधक ए 0 के गिरोत्रा व जौनपुर में साहित्य महारथी श्री पाल सिंह ‘क्षेम ‘ ,समय के संपादक-
दिनेश सिंह ‘दमभू ‘जी ,दिल्ली से मारकंडेय सिंह , असफाक अहमद रामपुर,मस्तराम बरेली ,दुर्गा
प्रसाद अवस्थी लखनऊ ,डा भानू शंकर मेहता , पंडित प्रकाश महाराज (तबलाबाद्क ),वी 0 के 0
गुप्त व माताओं एवं बहनों का भी आदर व प्यार पाकर यात्रा और भी -मंगलमय बन गयी थी |यात्रा
की निर्विघ्नता हेतु श्रीमती उर्मिला सिंह जो कि मेरी धर्म पत्नी हैं कि वझ से हो सकी | बाबा भोले के
दक्षिणी गेट पर आरती पत्नी ने की , तथा भानु शंकर मेहता जी ने हरी झंडी दिखाकर यात्रियों को
रवाना किया | इस यात्रा के प्रति मैं अपने संगठन के सदस्यों के प्रति आभारी हूँ | जिन्होंने बड़े
उल्लास व जोश के साथ यात्रा का सफल आयोजन किया और मनोबल बढ़ाया | अंत में अपने पुत्र –
पौत्रियों ,अजीत कुमार सिंह ,विनीत कुमार सिंह एवं सुपुत्री कु कीर्ती सिंह को शुभाशीर्वाद दूगा कि
कम उम्र में पिता द्वारा लिए गये संकल्प को सहन ही नहीं किया अपितु उत्साहित भी किया कि
जाइये पिता श्री ! पंजाब -कश्मीर की आज हाल्ट नाजुक है | आपके जाने से शायद जनता में अब
भी भाईचारे का भाव कायम हो सके |
-सुखमंगल सिंह ,अवध निवासी
“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994”
Comments
15 responses to ““काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994””
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Nice
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हार्दिक धन्यवाद Abhishek kumar जी
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प्रेरक
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हार्दिक स्वागत है आपका आदरणीय Pt, vinay shastri ‘vinaychand जी हार्दिक स्वागत है आपका
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Sundar
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Abhishek kumarजी हार्दिक शुक्रिया
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Sunder bhav
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NIMISHA SINGHAL जी हार्दिक शुक्रिया
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Nice
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देवेश साखरे ‘देव जी हार्दिक धन्यवाद
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बढ़िया
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राही अंजाना जी हार्दिक बधाई आदरणीय
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Good
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waah, waah
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ati sundar
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