कैसे तेरी पहचान करूँ ?

कोई कहता तू ऐसा है

कोई कहता तूं वैसा है

मिल जाऊँ कभी तुमसे तो

कैसे तेरी पहचान करूँ ?

 

….. यूई


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तू सबके दुःख हर जाता है

सबके अन्दर बसता है

तुझसे आगे ना सोच पाया

तुझको हर दर पर तो पाता हूँ

2 Comments

  1. Anirudh sethi - March 22, 2016, 8:02 pm

    nayab najar…. sundar panktiyaan

  2. प्रतिमा चौधरी - September 6, 2020, 5:40 pm

    , nice lines

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