कौन हूं मैं?

कौन हूं मैं?
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बिजलियां, आंधियां कोंधती उड़ती रहीं।
धारियां, छुरियां दिल पे निशा देती रहीं।
अठखेलियां, रंगरेलियां आवारगी करती रहीं।
विरक्तिया,सिसकियां
गम और ख़ुशी भरती रहीं।
रीतियां, बेड़ियां
बंदिशे देती रहीं।
गलबहियां, कनअखियां
सुकुन है कहती रहीं।
इश्क़ में कुछ तो बात थी
कचहरीयां होने लगी
मुश्क सा वो फैल गया
हर गली चर्चा होने लगी।
दिल की लगी भी थी क्या लगी
सदियों तलक सुलगी रही
क्या वो कोढ़ था???
जो खा गया
इस जिस्म को
और आत्मा पंछी सी उड़ गई।
मै अवाक थी!
सदियों तलक।
क्या मै लाश हूं?? या रूह कोई!
क्या में लाश हूं?या……
निमिषा


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8 Comments

  1. Anil Mishra Prahari - January 22, 2020, 3:18 pm

    बहुत सुन्दर।

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 22, 2020, 3:48 pm

    Nice

  3. Abhishek kumar - January 22, 2020, 8:02 pm

    Good

  4. Priya Choudhary - January 23, 2020, 10:27 am

    Nice

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