ग़ज़ल

उपर चढ़ते , नीचे जाते
ईमान खरीदे बेचे जाते
~
ए सी कमरों में बैठ कर
क्या क्या नहीं सोचे जाते
~
सियासत का पहला पाठ
पाँव कैसे खींचे जाते
~
किरदार पे कैसा भी हो दाग
पैसों से सब पोंछे जाते
~
सच बोलने वालों के तो
सरे राह मुँह नोचे जाते
~
स्कूल भेजना बंद किया
जेल तभी तो बच्चे जाते
******************************
रचानकार :- गौतम कुमार सागर

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. Ritika bansal - July 28, 2016, 11:51 am

    behtareen ji

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 8, 2019, 5:24 pm

    वाह बहुत सुंदर

Leave a Reply