गुरु रूप भगवान

मेरे जीवन की पहली कविता मेरे गुरु को समर्पित
Teachers Day
स्कूल का वह दिन मेरे जीवन का एक सबसे खास दिन बन गया जिसे मैं कभी भुला नहीं सकती उस दिन मुझे पहली बार मेरी टीचरों ने बताया कि यह भी एक काबिलियत है आज उन्हीं टीचरों की वजह से मैं आप सबके बीच अरे अपने विचार लिख रही हूं

गुरु रूप भगवान मेरी
जा छुपे हैं कहां
ढूंढ ली है जमी
मैंने ढूंढ लिया ये आसमा

पलके झुका के मैंने फिर
आंखों से यह फरियाद की
ज्योति रूप में दिखाना मुझे
छवि मेरे गुरु रूप भगवान की

कठोरता होती है भले
जिनकी मार और ललकार में
तीन लोग का ज्ञान गुरु
हमें देते हैं उपहार में

दूर अंधेरा कर देते हैं
जो गुरु अपने ज्ञान से
खुद बनकर ज्योति जो
दूसरों को सदा प्रकाश दें

जिसने ज्ञान का दान देकर
जीवन मेरा धन्य किया
तीन लोक के ज्ञान से
मेरे जीवन को संपन्न किया

इतना कहकर जब मैंने
आंखों को अपनी खोल दिया
ऐसा लगे गुरु ज्ञान के कारण
आत्मा से सच बोल दिया

काश स्कूल लाइफ कैसे जी पाते भले 1 दिन के लिए ही सही

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