गज़ल – प्यार की महक |

गज़ल – प्यार की महक |
तुम्हारे प्यार की महक अभी बाकी है |
दूरिया ही सही तेरी याद अभी बाकी है |
रहे जहा बनके चाँद तू चमकता रहेगा |
तू पास रहे न रहे धमक तेरी बाकी है |
जिंदगी रेत सही बना लो घरौंदा मुझे |
मै जुगनू ही सही चमक अभी बाकी है |
याद करोगे जब भी पास मुझे पाओगे |
मचल कर आओ चाहत अभी बाकी है |
बिरान जिंदगी तेरी गुलशन बना दूंगा |
जहां हो चर्चा तेरा ललक अभी बाकी है |
तेरे सिवा नजरों मेरे कोई टिकता नहीं |
तेरी दीवानगी की सनक अभी बाकी है |
कहकर बेवफा गुनाहगार न बना मुझे |
साथ जीने मरने की बहक अभी बाकी है |
कर के इतनी मोहब्बत पागल न बन तू |
परवाना हूँ जल जाने दहक अभी बाकी है |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो, झारखंड,मोब- 9955509286


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6 Comments

  1. Satish Pandey - January 21, 2021, 8:38 am

    तुम्हारे प्यार की महक अभी बाकी है |
    दूरिया ही सही तेरी याद अभी बाकी है |
    —— बहुत खूब, अत्यंत उम्दा रचना

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 21, 2021, 11:03 am

    वाह वाह क्या बात है श्याम जी!!!!!! अतिसुंदर रचना

  3. Geeta kumari - January 21, 2021, 2:27 pm

    सुंदर रचना

  4. Shyam Kunvar Bharti - January 22, 2021, 12:54 am

    शुक्रिया आपका

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