चलो इंसान बनते हैं।

चलो इंसान बनते हैं।

कब तक जकड़े रहेंगे ,
हम भेदभाव की जंजीरों में ।
कब तक पकड़े रहेंगे हम ,
धर्म- भ्रम की बेड़ियों से।

मानवता की चलो ,
पहचान बनते हैं ‌
भगवान तो ना ही सही ,
चलो इंसान बनते हैं।

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Responses

  1. मानव को अच्छी सीख देती हुई रचना कवि की भावनाएं बहुत ही उत्तम है तथा मानव में जागरूकता लाने वाली हैं

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