चालबाजी

तेरी चालबाजी सब जानता हूँ मैं
न जाने फिर भी क्यों इतना तुझे मानता हूँ मैं।
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दिल बहुत बार दुखाया तूने पर
तुझे देख कर यही एहसास होता है
कि सदियों से तुझे जानता हूँ मैं।


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11 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 31, 2020, 7:17 am

    सुन्दर

  2. मोहन सिंह मानुष - July 31, 2020, 7:56 am

    बहुत ही उम्दा

  3. Master sahab - July 31, 2020, 9:19 am

    डबल मीनिंग की कविता लिखकर आप यथार्थ का चित्रण कर रहे हैं

  4. Geeta kumari - July 31, 2020, 10:27 am

    यथार्थ चित्रण

  5. Suman Kumari - July 31, 2020, 3:17 pm

    सुन्दर

  6. प्रतिमा चौधरी - September 26, 2020, 1:37 pm

    सुंदर पंक्तियां

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