चिट्टियां

आरज़ू थी कि मेरे हाथ में तेरा हाथ होगा….
क्या खबर थी कि
हाथ सिर्फ़ चिट्ठियां ही आएंगी ।

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चिट्ठियां

दिल की बातें बोलती हैं चिट्ठियां राज कितने खोलती हैं चिट्टियां भावों को जीवंत बनाती हैं, आंखों को भिगोती हैं चिट्ठियां

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