” जरा इक निग़ाह डाल “# 2 liner ” 3 “

ज़रा इक निग़ाह डाल देखों सावन पर ” पंकजोम ” प्रेम ” ” ….

ख़ामोश अल्फ़ाज़ मेरे ,सबसे बतियाते बतियाते दिखेंगे …..

 

पंकजोम ” प्रेम “

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तराश लेता हूँ सामने वाले की फितरत ...... बस एक ही नज़र में ..... जब कलम लिख देती है , हाल - ए - दिल .... तो कोई फ़र्क नहीं रहता ..... जिंदगी और इस सुख़न - वर में....

7 Comments

  1. Sarita Singh - December 13, 2015, 10:23 pm

    teri aadat muje is kadar lgi
    “jnab”
    meri khamosi b baate krne lgi..

  2. anupriya sharma - December 14, 2015, 8:06 pm

    nice pankaj

    • पंकजोम " प्रेम " - December 14, 2015, 8:10 pm

      शुक्रिया तुम्हारा ए – महकते , ग़ुलाब ….
      ज़रा अलग अंदाज़ में क़बूल करे ….
      इस सुख़नवर का , आदाब …

      Sukkriyaa ji..

  3. Anjali Gupta - December 15, 2015, 5:43 pm

    nice

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