जां तक निसार हुआ

तुम्हीं ने कहा था, हां मुझे भी तुमसे प्यार हुआ।
हुई क्या खता, तुम्हारी नजरों में गुनहगार हुआ।

हमने तो डाल दी, सारी खुशियां तुम्हारे दामन में,
क्या रह गई कमी, प्यार में जां तक निसार हुआ।

करते रहे हम, सारी उम्र बेपनाह मोहब्बत तुमसे,
मेरी मोहब्बत का फिर भी ना, तुझे ऐतबार हुआ।

कल तक जो थकते ना थे, लेते नाम हमारा,
आज क्यों तुम्हारे वास्ते, ‘देव’ खतावार हुआ।

देवेश साखरे ‘देव’

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

11 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 9, 2019, 9:58 pm

    अतिसुंदर भाव

  2. राही अंजाना - November 9, 2019, 10:04 pm

    आह

  3. NIMISHA SINGHAL - November 9, 2019, 11:52 pm

    Khub

  4. Panna - November 10, 2019, 11:44 am

    बहुत खूब सर

  5. nitu kandera - November 11, 2019, 8:20 am

    Nice

  6. Abhishek kumar - November 24, 2019, 9:42 am

    देव जी

Leave a Reply