ता-जन्म जिस्म छू कर भी

बस मुसकरा कर तेरी आँखें लूटा देती हैं प्यार इतना

ता-जन्म जिस्म छू कर भी ना लूटा पाये कोई इतना 

                                                             …. यूई


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2 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 8, 2019, 7:49 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  2. Kanchan Dwivedi - March 9, 2020, 6:18 am

    Nice

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