तुम्हारा अक्स

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तुम्हारे अक्स से दुनिया है रोशन ,

सुना है चाँद की तू चांदनी है .

सलीका प्रेम में अब क्या करेगा ,

नज़र को अब के माफ़ी मिल चुकी है .

ज़रा अब दर्द से नहला दो मुझको,

वफ़ा की धूल काफी चढ़ चुकी है .

समंदर अब के पानी मांगता है , 

सुना है प्यास उसकी बढ़ चुकी है .

कहीं पर मीर ने देखा है तुझको ,

चमक चेहरे के उसकी बढ़ चुकी है.

…atr

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