दिल्ली

दिल्ली के चोर सन्नाम हैं जहाँ में,
नेता और चोर बेइमान हैं वहाँ के।
कभी मत आना उनके झांसे में,
फ्री फ्री बोलकर ठगते बहुत है।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

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Responses

  1. परिभाषा तथा आंग्ल भाषा का प्रयोग करके कवि ने पराकाष्ठा को दिखाया है

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