दिल ए अजीज

आब ए चश्म की नुमाइश ना आंखें करें मेरी
एहतियात से दूर करें अख्ज की भीड़ को
आफताब की किरण भी ना छू सके मुझे
अकिबत की फिक्र है दिल अजीज को

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