दिल की आरजू

0

तुमने मेरे दिल में
दर्द ऐसा भर दिया
कि मैंने खुद के ही दिल
का कत्ल कर दिया.

पहले दिल में मेरी
सांसों को थाम रखा था
अब मैंने हाथों में
दिल को थाम रखा है.

मेरे साथ जीने की थी
मेरे दिल की आरजू
अनदेखा कर दिया उसे
जो मेरी तेरे साथ जीने की थी आरजू.

मेरे दिल ने कहा…
चाहे मुझ में बेहिसाब दर्द है
पर मेरी सांसों को मुझसे दूर ना करो
अपनी चाहत के लिए मुझे मरने पर मजबूर ना करो.

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

5 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - December 2, 2019, 11:11 am

    बहुत खूब

  2. Abhishek kumar - December 2, 2019, 11:43 am

    Good

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 2, 2019, 12:00 pm

    Nice

Leave a Reply