दुनियाँ बदल रही है !!

ये दुनियाँ बदल रही है, या बस हम बदल रहे हैं ;
दौड़ बची है पैसों की, सब, सबसे आगे निकल रहे हैं !

यारियाँ है मतलब की, फर्ज अब हक़ में बदल रहे हैं ;
रिश्तों में विश्वाश अब कहाँ, यक़ीन अब शक़ में बदल रहे हैं !

माँ, बहनें महफूज़ नहीं, रक्षक अब भक्षक में बदल रहे हैं ;
जिनके कदमो में हैं राम-ओ-रहीम, उनको पैरों से कुचल रहे हैं !

हर चेहरे पर इक नकाब है ‘अक्स’, और लफ्जों में सियासत;
हर शख्स खुदी में ख़ुदा है, इंसान मजहब में बदल रहे हैं !………#अक्स

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A CA student by studies, A poet by passion, A teacher by hobby and a guide by nature. Simply I am, what I am !! :- "AkS"

9 Comments

  1. Panna - November 13, 2015, 8:51 pm

    अब नहीं रूह में वो मिल्कियत
    जिसकी रोशनी से दुनिया रोशन थी
    हर शख्स, हर रूह आजकल
    अंधेरों मे डल रही है

  2. पंकजोम " प्रेम " - November 13, 2015, 9:17 pm

    सच्चाई को कर दिया हर मोड़ पर नाकामयाब ….
    ना जाने क्यों बुराई , अपना दबदबा बनाने में सफल रही है….

  3. Anjali Gupta - November 13, 2015, 11:49 pm

    reflect reality of present time…

  4. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 12:54 pm

    Good

  5. राम नरेशपुरवाला - September 30, 2019, 10:08 pm

    वाह

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