दोस्ती प्यार का मीठा दरिया है

आओ, मुझमें नहाओ,
डूबकी लगाओ
प्यार का सौंधा पानी
हाथों में भर कर ले जाओ।

आओ,
जी भर कर गोता लगाओ,
मौज-मस्ती की शंख-सीपियाँ
जेबों में भर कर ले जाओ।

दोस्ती का दरिया
गहरा है, फैला है
इसमें नहीं तैरती
धोखे की छोटी नौका
कोशिश की तो
बचने का नहीं मिलेगा मौका।

– Puneet


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3 Comments

  1. Kavi Manohar - July 30, 2016, 11:40 pm

    Bahut khoob

  2. Ritika bansal - August 2, 2016, 11:55 am

    lajabaab

  3. स्मृति (फाल्गुनी) - August 5, 2016, 1:00 pm

    यह फाल्गुनी यानी मेरी कविता है जो वेबदुनिया में 2008 से लगातार प्रकाशित है। कृपया कवयित्री का नाम भी दें या कविता हटाएं …स्मृति (फाल्गुनी)

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