नारी सम्मान को समर्पित मेरी कविता

ख़ुदा अगर नारी न बनाता
कोई मर्द यहां वजूद न पाता,
हमेशा हो इनके सम्मान से नाता
देश की हो ये भाग्य-विधाता!
इनपे कोई गन्दी नजर न उठाता
अगर हर बार देश इंसाफ दिलाता,
कोई माँ-बाप आंसू न बाहाता
कानून तुरंत मौत की सजा सुनाता!
शिक्षा-सुरक्षा हर नारी को मिल जाता
सबकी बहन,बेटी या चाहे हो माता,
खुल के जीने का जब मौसम आता
हर कोई बेटी होने का जशन मनाता!
इंसानियत हमे है यही सिखाता
देखो कौन-कौन है बेटी को बचाता!

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