निराशा में हमेशा हौसला

दिया जब भी दिखाता हूँ मैं
तुम सूरज दिखाती हो,
निराशा में हमेशा हौसला
मुझमें जगाती हो।
बताओ ना कि इतना क्यों
मुझे सम्मान देती हो,
स्वयं की हर ख़ुशी को क्यों भला
मुझ पर लुटाती हो।


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20 Comments

  1. MS Lohaghat - September 5, 2020, 10:27 pm

    बहुत ही बढ़िया

  2. Chetna jankalyan Avam sanskritik utthan samiti - September 5, 2020, 10:28 pm

    Shandar

  3. Indu Pandey - September 5, 2020, 10:37 pm

    बहुत सुन्दर, वाह

  4. मोहन सिंह मानुष - September 5, 2020, 10:58 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  5. Suman Kumari - September 5, 2020, 11:36 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  6. Chandra Pandey - September 6, 2020, 6:44 am

    Very very nice

  7. Devi Kamla - September 6, 2020, 6:50 am

    वाह पाण्डेय जी, बहुत अच्छा लिखते हो।

  8. Chandra Pandey - September 6, 2020, 9:03 am

    इस सुंदर कविता हेतु सादर धन्यवाद सर

  9. Geeta kumari - September 6, 2020, 9:56 am

    बेहतरीन प्रस्तुति,लाजवाब

  10. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 6, 2020, 10:39 am

    अतिसुंदर

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